शुक्रवार, जुलाई 25, 2025
बघेरा मर गया
शनिवार, अक्टूबर 21, 2023
देवता झूठ नहीं बोलता
देवता झूठ नहीं बोलता
- ------ ----- ---- --- बात निकलेगी तो दूर तलक जाऐगी। अब शीर्षक ही लीक से हट कर हो तो चर्चा होना
बुधवार, अक्टूबर 04, 2023
सच्ची दूकान
हर रोज़ ही
उस दूकान पर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी। भीड़ हो भी क्यों न?
जो सामान कहीं अन्य दूकान पर ना मिले तो उस दूकान पर सस्ता और हमेशा
उपलब्ध हो जाता था। यही कारण था कि उस दूकान पर हमेशा भीड़ उमड़ी रहती थी। दूकान का
नाम भी आकर्षित करता था सच्ची दूकान ।
हर वर्ष उस
दूकान का मालिक सभी के लिए भंडारे का आयोजन भी करता और खूब दान आदि भी देता। लोग
कहते थे कि ईश्वर की उस पर विशेष कृपा है।
कृपा के
साथ साथ उसकी समृद्धि की चर्चा अक्सर लोग करते रहते थे। गाहे बगाहे ये चर्चाएं मुझ
तक भी पहुंचती रहती थी। इतनी चर्चा और प्रसिद्धि के बावज़ूद कभी उस दूकान से सामान
लेने का अवसर नहीं मिला।
रविवार का
दिन वैसे तो आराम का दिन होता है। रसोई का कुछ सामान समाप्त हो गया था। सूची लम्बी
बन गई थी। सोचा उसी दूकान का लाभ उठाया जाए। परिचय भी हो जायेगा।
सामान की
सूची दूकानदार को दी। सामान पैक हुआ और वापस हो लिया। घर आ कर सामान खोलने लगा तो
एक पैकेट पर बेस्ट बिफोर डेट पर पढ़ी। डेट
खत्म हो चुकी थी। पूरा सामान चेक किया तो तीन सामान की डेट एकस्पायरी निकली। ऐसी
षिकायत अन्य ग्राहकों से भी सुनने को मिली थी। लोग तो कहते थे कि पूरा साल
एकस्पायरी बेचते रहो और साल में भण्डारा और दान दिया करो। पाप कट जाते है। उस
दूकान के सस्ते सामान और ईश्वर कृपा का गणित धीरे धीरे मेरी समझ में आ रहा था।
मंगलवार, मार्च 30, 2021
हिमाचल प्रदेश की प्रतिनिधि लघुकथाएं
हिमाचल प्रदेश की प्रतिनिधि लघुकथाएं। बत्तीस रचनाकारों की एक सौ चौव्वन लघुकथाएं। सुदर्शन वशिष्ठ जी का कुशल और अनुभवी सम्पादन पुस्तक की उपयोगिता को बढ़ा देता है। सभी लघुकथाएं एक से बढ़ कर एक है। इन लघुकथाओं से गुजरते हुए मुझे ममता, व्यवस्था के प्रति आक्रोश, सामाजिक असमानता के लिए चिंता, परिवार में मानवीय दृष्टिकोण , टूटती मान्यताएं दिखीं। सभी रचनाकारों की रचनाएं प्रभावित करती है।
आशा शैली की स्वेटर प्रतिकूल परिस्तिथियों में भी ममता की अदृश्य भावना को महत्वपूर्णता से दर्शाती है। रतन चंद रत्नेश की लघु कथा गोल्ड मेडल एक प्रश्न हमारे सामने रख देती है। डॉ प्रत्यूष गुलेरी की आँख व्यवस्था पर चोट करती है। रत्न चंद निर्झर पलटन असमान व्यवस्था को दर्शाती है।श्रीनिवास जोशी शेर का शिकार में जुगाड़ तंत्र का दर्शन करवाते है।
गंगा राम राजी पैग का इलाज के माध्यम से जीवन में अनुशासन के प्रति संकेत देते है।
आचार्य भगवान देव चैतन्य दायित्व में अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहने की सीख देते है।तारा नेगी मां के माध्यम से ममत्व का बोध करवाती है।कमल प्यासा कूड़े वाला के माध्यम से समाज में असमानता का दर्शन करवाते है। कृष्ण चंद महादेविया बस और नहीं के जरिए समाजिक असमानता के विरुद्ध खड़े होने का सन्देश देती है। कुलदीप चंदेल की रिपोर्ट आपातकालीन सेवाओं की पोल खोलती है।अदित कंसल इलाज के माध्यम से परिवार में बढ़े बूढ़ों के प्रति कर्तव्य का बोध करवाते है।
प्रदीप गुप्ता की सोच व्याप्त भ्रष्टाचार की और इशारा करती है।अनिल कटोच की शिकार दोस्ती के फ़र्ज़ की ओर इशारा करती है।कुल राजीव पन्त बातें के माध्यम से समाप्त होते संस्कारों की तरफ चिंता व्यक्त करती है। अरुण गौतम की ठगी खोखले आदर्शों को दर्शाती है सुदर्शन भाटिया की वक्त की नज़ाकत कथनी और करनी की तरफ इशारा करती है।जगदीश कपूर धर्म के माध्यम से धार्मिक कट्टरता की तरफ संकेत करते है साथ ही बेड़ियों के टूटने का भी सुखद एहसास करवाती है।
देवराज डढवाल ने देश धर्म से आतंकवाद पर चिंता व्यक्त करते है।डॉ रजनी कांत अमरत्व के माध्यम से आदमी के शोहरत कमाने की लालसा पर प्रकाश डालते हैं। अशोक दर्द गुरु मंत्र से निरंतर टूटते आदर्शों की तरफ इशारा देते है। मृदुला श्रीवास्तव देवता का दोष के ज़रिए समाज मे गहरे से घर कर गई रूढ़िवादिता उजागर करती है। राजीव कुमार त्रिगर्ति मंत्री जी के पेन के माध्यम से राजनीतिक कार्य प्रणाली की जानकारी देती है। अर्चना नौटियाल मन बहुरंगी में पति पत्नी के झगड़ों में एक पत्नी की बच्चों के लिए ममता और पारिवारिक उत्तरदायित्व को दर्शाती है।
दीप्ति सारस्वत ज़हर में समाज में स्त्री शोषण को उजागर करती है।मीनाक्षी मीनू अस्तित्व की लड़ाई के माध्यम से प्रतिकूल परिस्तिथियों में स्त्री संघर्ष को बताती है।
मनोज चौहान लोक लाज में जाति व्यवस्था पर चोट करते है। अनिल शर्मा नील लड़ाई के माध्यम से वर्गों में अधिपत्य संघर्ष की कहानी कहते है। डॉ सीमा शर्मा तमाचा में एक पुत्र के अंतद्वद्व और कर्तव्य की रचना करती है। सौरभ ज्ञानी के माध्यम से अवसरवादिता का दर्शन करवातें है। सुदर्शन वशिष्ठ जी पिता का घर के माध्यम से खोखले होते जा रहे रिश्तों को बताते है।
एक सौ साठ पृष्ठों का ये संकलन संग्रहणीय और पठनीय है। के एल पचौरी प्रकाशन गाज़ियाबाद से प्रकाशित हिमाचल प्रदेश की प्रतिनिधि लघुकथाएं फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है ।
गुरुवार, अप्रैल 02, 2020
गुलदस्ता
शुक्रवार, जनवरी 31, 2020
मुर्गा
गुरुवार, फ़रवरी 02, 2017
सुंदरता
उसकी बातें उसकी सुंदरता की तरह ही आकर्षक होती थी। कोई भी उससे मिलता तो उसका मुरीद हो जाता। मैं भी उसकी उसकी बातों से बेहद प्रभावित रहा।
कार्यालय में सभी स्टाफ सदस्य वार्षिक उत्सव पर विचार विमर्श कर रहे थे कि सेवादार ने सूचना दी कि गांव से उसके सास ससुर मिलने आये है। ।
मैंने उससे आग्रह किया कि आप सास ससुर से मिलने जा सकती हैं। उसने बड़े ही रूखे स्वर में तुरंत इनकार कर दिया और कहने लगी उनका लड़का मिल लेगा । उनके शरीर से तो गांव वाली गंध आती है।
मैं हैरानी से उसका चेहरा ताकता रह गया। उसकी सुंदरता अब मुझे कुरूपता नज़र आ रही थी।
शनिवार, जनवरी 28, 2017
मित्रता
यूँ तो उससे कोई पुराना परिचय नहीं था, मात्र इतना कि वो दूकानदार था और मैं उसका ग्राहक। रोज उससे दूध की थैली ले जाता और दुआ सलाम हो जाता। उसका हमेशा का आग्रह की कभी घर आइयेगा चाय पर, मैं कभी पूरा नहीं कर पाया।
उसकी मुस्कुराहट उसका व्यवहार उसकी घनिष्ठ मित्रता प्रदर्शित करती थी।
उस दिन छोटे रूपये न होने के कारण पांच सौ का नोट उससे देना चाहा । देखते ही बोला सर जी दूध तो ख़त्म हो गया। अब चालीस रूपये के चक्कर में पांच सौ का नोट कौन स्वीकारता। मेरे दुकान से बाहर निकलते ही उसने दूसरे ग्राहक को दूध की थैलियां दे दी। उस ग्राहक ने उससे पूछा ये तो आपके नियमित ग्राहक है फिर इस क्यों? उसने मुस्कुराते हुए उस ग्राहक को जवाब दिया जनाब पांच सौ से चार सौ साठ रूपये भी तो वापिस करने थे।
उसकी मुस्कुराहट और घनिष्टता का रहस्य मेरे सामने बिखरा पड़ा था।
रविवार, मार्च 27, 2016
समय
गुरुवार, अक्टूबर 03, 2013
हिमाचल का पहला लघुकथाकार सम्मेलन
हिम साहित्यकार सहकार सभा पंजीकृत प्रदेश कार्यालय मिश्रा भवन रौड़ा सेक्टर बिलासपुर 174001
हिम साहित्यकार सहकार सभा द्वारा आगामी 28 नवंबर 2013 को हिमाचल प्रदेश के दिल बिलासपुर के नगर परिषद सभागार में हिमाचल का पहला लघुकथाकार सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।
इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं लघुकथा के सशक्त हस्ताक्षर कमलेश भारतीय होंगे।इसके अलावा हरियाणा और उत्तराखंड से भी जाने माने लघुकथाकार विशिष्ट अतिथि के रूप में पधार रहे हैं। इस सम्मेलन में आजकल लिखी जा रही लघुकथा पर विशेष चर्चा होगी और लघुकथा पाठ भी करवाया जाएगा। सम्मेलन में एक अद्वितीय स्मारिका का प्रकाशन भी किया जा रहा है
आपसे आग्रह है कि आप अपनी बेहतरीन पांच लघुकथाओं का सैट और अपने आने की पूर्व सूचना उपरोक्त पते पर दिनांक 15 अक्तूबर 2013 तक भिजवाएं ताकि उचित व्यवस्था की जा सके और चयनित लघुकथा को स्मारिका में प्रकाशित किया जा सके।
अरूण डोगरा रीतू रतन चंद निर्झर
प्रदेश महासचिव प्रदेश अध्यक्ष
98572 17200 94597 73121
रविवार, सितंबर 29, 2013
22वाँ अंतर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन
बुधवार, जनवरी 23, 2013
उपाय
सोमवार, जनवरी 31, 2011
भारत की हिंदी लघुकथाएं
पेशे से चिकित्सक डॉ. रामकुमार घोटड़ ने साहित्य के क्षेत्र में लघुकथा पर वृहद और कई महत्वपूर्ण कार्य किया है और अब तक उन्हें 22 पुस्तकों में समेटा है। इसी श्रृंखला में सद्य-प्रकाशित पुस्तक ‘भारतीय हिन्दी लघुकथाएं’ इस मायने में ध्यान खींचती है कि इसमें देश के लगभग हर प्रान्त के हिन्दी लघुकथाकारों की लघुकथाएं समाहित हैं और लघुकथा के सभी दिग्गज इसमें शामिल हैं। यह संकलन दो खंडों में है। ‘विरासत के धनी’ नामक पहले खंड में भारतेंदु हरिश्चंद्र , माधव राव सप्रे, प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद , पदुमलाल पन्नालाल बक्षी, उपेन्द्रनाथ अश्क, रावी और विष्णु प्रभाकर जैसे मूर्धन्य व अग्रज लेखकों की एक-एक लघुकथाएं संकलित हैं जबकि दूसरे खंड का नाम ‘विरासत के कर्णधार’ रखा गया है। इसमें लगभग वे सभी आधुनिक लेखक हैं जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर लघुकथा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनायी है। इन लघुकथाकारों की तीन-तीन लघुकथाएं इसमें शामिल की गई हैं। डा. घोटड़ के अनुसार प्रथम व द्वितीय खंड में पुस्तक को विभक्त करने का उद्देष्य यह है कि पाठक पूर्ववर्ती ओर वर्तमान में लिखी जा रही लघुकथाओं से गुजरकर उनका पठनीय रसास्वादन और तात्विक मूल्यांकन कर सके।मंगलवार, जुलाई 14, 2009
लघुकथा : कलयुग
एकाएक इंदर बोल पड़ा अब वो दिन दूर नहीं जब घर के बूढों की भी नकारा होने पर घर से बाहर धकेल दिया जाएगा और आवारा घुमते दिखने पर कहा जाएगा, 'अरे यह तो फलां का बाप है !'
मुझे इंदर के चेहरे पर क्रोध के भाव साफ दिख रहे थे ! एक कटु सत्य मेरे सामने चुपचाप मुस्कुरा रहा था !
(12 जुलाई 2009 को दिव्य हिमाचल हमसफर परिशिष्ट में प्रकशित)














