google.com, pub-7517185034865267, DIRECT, f08c47fec0942fa0 आधारशिला : उपाय

बुधवार, जनवरी 23, 2013

उपाय


उस दिन बस में भीड़ थी। अपेक्षाकृत ज्‍यादा भीड़। घर पहुंचने के लिए उसी बस में यात्रा करना जरूरी भी था। बस के भीतर गाना गाते शोर मचाते कुछ उदण्‍ड छात्रों को देख कर मुझे गुस्‍सा तो आया परन्‍तु चुप्‍पी के सिवा और क्‍या किया जा सकता था। 
कुछ दूर चलने के बाद बस के ब्रेक चरमराये तो शोर उठा चैकर आ गया चैकर आ गया। टिकट चैक हुए । उन छात्रों के पास टिकट थे ही नहीं। परिणमत: कुछ डाट के साथ उन्‍हे टिकट दिलाया गया और भविष्‍य के लिए चेतावनी भी दी ग‍ई।
बस पुन: चली। अब सब कुछ सामान्‍य था। न शोर और न ही गीत संगीत। अब वे छात्र बस में स्‍वयं को अलग थलग पा रहे थे। परन्‍तु शेष यात्रा शान्तिपूर्वक हुई। 
मैं स्‍वयं को बेहद हल्‍का महसूस कर रहा था। 

0 Reviews:

एक टिप्पणी भेजें

" आधारशिला " के पाठक और टिप्पणीकार के रूप में आपका स्वागत है ! आपके सुझाव और स्नेहाशिर्वाद से मुझे प्रोत्साहन मिलता है ! एक बार पुन: आपका आभार !

 
ब्लोगवाणी ! INDIBLOGGER ! BLOGCATALOG ! हिंदी लोक ! NetworkedBlogs ! हिमधारा ! ऐसी वाणी बोलिए ! ब्लोगर्स ट्रिक्स !

© : आधारशिला ! THEME: Revolution Two Church theme BY : Brian Gardner Blog Skins ! POWERED BY : blogger