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शनिवार, मई 15, 2010

दोषों से मुक्त

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एक बार ईसा मसीह को एक ऐसे व्यक्ति ने अपने घर आमंत्रित किया, जिसे लोग दुर्व्यसनी होने के कारण घृणा करते थे। ईसा खुशी-खुशी उसके घर पहुंचे, प्रेम से भोजन किया और आशीर्वाद देकर लौट आए। ईसा के शिष्यों ने कहा, ‘आपको समाज से बहिष्कृत व्यक्ति के यहां नहीं जाना चाहि था।ईसा ने उत्तर दिया, ‘अच्छे व्यक्ति तो अच्छे हैं ही, उन्हें उपदेश देने की क्या आवश्यकता है? हमें ऐसे ही व्यक्ति के पास जाना चाहिए, जिसे कुछ बातें बताकर अच्छा बनाया जा सके।

अथर्ववेद में कहा गया है, ‘उत देवा, अवहितं देवा उन्नयथा पुनः। उतागश्चक्रुषं वा देव जीवयथा पुनः॥अर्थात, हे दिव्य गुणयुक्त विद्वान पुरुषो, आप नीचे गिरे हुए लोगों को ऊपर उठाओ। हे देवो, अपराध और पाप करने वालों का उद्धार करो। हे विद्वानो, पतित व्यक्तियों को बार-बार अच्छा बनाने का प्रयास करो। हे उदार पुरुषो, जो पाप में प्रवृत्त हैं, उनकी आत्मज्योति को जागृत करो।

स्वामी रामकृष्ण परमहंस कहा करते थे कि घर-बार त्यागकर साधु बने व्यक्ति का परम धर्म है कि वह जिस समाज से प्राप्त भिक्षा से प्राणों की रक्षा करता है, उस समाज के लोगों को भक्ति और सेवा का उपदेश देता रहे। लोगों को प्रेरणा देकर ही साधु समाज के ऋण से उऋण हो सकता है। दुर्व्यसनों में लिप्त लोगों के दुर्गुण छुड़वाना, उन्हें सच्चा मानव बनाने का प्रयास करना साधु का कर्तव्य है। यह कार्य वही संत कर सकता है, जो स्वयं दुर्व्यसनों से मुक्त हो। परमहंस जी स्वयं दोषों से मुक्त थे, इसलिए वह पतितों के आमंत्रण को स्वीकार करने में नहीं हिचकिचाते थे।

संयम

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हमारे ऋषि-मुनियों तथा धर्मशास्त्रों ने संकल्प को ऐसा अमोघ साधन बताया है, जिसके बल पर हर क्षेत्र में सफलता पाई जा सकती है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था, ‘दृढ़ संकल्पशील व्यक्ति के शब्दकोश में असंभव शब्द नहीं होता। लक्ष्य की प्राप्ति में साधना का महत्वपूर्ण योगदान होता है। संकल्प जितना दृढ़ होगा, साधना उतनी ही गहरी और फलदायक होती जाएगी।’
शास्त्र में कहा गया है, ‘अमंत्रमक्षरं नास्ति-नास्ति मूलमनौसधम्। अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः।’
यानी ऐसा कोई अक्षर नहीं है, जो मंत्र न हो। ऐसी कोई वनस्पति नहीं, जो औषधि नहीं हो। ऐसा कोई पुरुष नहीं है, जो योग्य न हो। प्रत्येक शब्द में मंत्र विद्यमान है, उसे जागृत करने की योग्यता होनी चाहिए। प्रत्येक वनस्पति में अमृत तुल्य रसायन विद्यमान है, उसे पहचानने का विवेक चाहिए। व्यक्ति में योग्यता स्वभावतः होती है, किंतु उस योग्यता का सदुपयोग करने का विवेक होना चाहिए।
साधना को लक्ष्य से जोड़कर मानव अपनी योग्यता का उपयुक्त लाभ उठा सकता है। दृढ़ संकल्प और साधना के बल पर मानव नर से नारायण भी बन सकता है। प्रमाद, अहंकार, असीमित आकांक्षाएं मनुष्य को दानव बना सकती हैं। और इस तरह वे उसके पतन का कारण हैं। इसीलिए भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में सत्संग, सात्विकता, सरलता, संयम, सत्य जैसे दैवीय गुणों को जीवन में ढालकर निरंतर अभ्यास-साधना करते रहने का उपदेश दिया है। संयम का पालन करते हुए साधना में रत रहने वाला व्यक्ति निश्चय ही अपने सर्वांगीण विकास में सफल होता है

विनयशीलता

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विख्यात दार्शनिक बेंजामिन फ्रेंकलिन ने सभी धर्म-संप्रदायों की बारह श्रेष्ठ चीजों, जैसे अहिंसा, सत्य, सद्भाव, मौन आदि का चयन कर जीवन में उनका पालन करने का संकल्प ले लिया। वह प्रतिदिन आकलन करते कि क्या उस दिन उन सद्गुणों का पालन किया गया? कुछ ही दिनों में वह अहंकारग्रस्त होकर सोचने लगे कि शायद ही कोई इतने नियमों का पालन करता होगा। एक दिन उन्हें एक संत मिले। वह हर क्षण ईश्वर की याद में खोए रहते थे। वह परम विरक्त थे और सांसारिक सुख-सुविधाओं की उन्हें लेशमात्र भी चाह नहीं थी। फ्रेंकलिन उस संत के प्रति अनन्य श्रद्धा भावना रखते थे।

संत से लंबे अरसे बाद उनकी भेंट हुई थी। संत ने पूछा, ‘वत्स, क्या तुम तमाम समय अध्ययन, उपदेश और लेखन में ही व्यस्त रहते हो या कभी-कभी उसे भी याद करते हो, जिसने तुम्हें इस संसार में भेजा है?’ फ्रेंकलिन ने गर्व से कहा, ‘महात्मन, मैं बारह नियम व्रतों की साधना कर चुका हूं। उनका दृढ़ता से पालन कर रहा हूं। मैं शपथपूर्वक कह सकता हूं कि शायद ही किसी ने इतने नियमों का पालन व्रत लिया हो।’

संत समझ गए कि इस दार्शनिक को अपने नियम पालन का अहंकार हो गया है। उन्होंने कहा, ‘मेरे बताए तेरहवें नियम व्रत का पालन शुरू कर दो। जीवन सफल हो जाएगा। वह है, विनयशीलता और विनम्रता।’ संत के शब्द सुनते ही फ्रेंकलिन के ज्ञान-चक्षु खुल गए। उन्हें लगा कि वास्तव में विनम्रता, व संवेदनशीलता ही तो समस्त गुणों का शील प्राण है। उस दिन से फ्रेंकलिन ने तुच्छ भाव से अपने हृदय में झांकना शुरू कर दिया

चरित्र

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धर्मशास्त्रों में शील (चरित्र) को सर्वोपरि धन बताया गया है। कहा गया है कि परदेश में विद्या हमारा धन होती है। संकट में बुद्धि हमारा धन होती है। परलोक में धर्म सर्वश्रेष्ठ धन होता है, परंतु शील ऐसा अनूठा धन है, जो लोक-परलोक में सर्वत्र हमारा साथ देता है।

कहा गया है कि शीलवान व्यक्ति करुणा एवं संवेदनशीलता का अजस्र स्रोत होता है। जिसके हृदय में करुणा की भावना है, वही सच्चा मानव कहलाने का अधिकारी है। संत कबीर भी शील को अनूठा रत्न बताते हुए कहते हैं-
सीलवंत सबसों बड़ा, सील सब रत्नों की खान
तीन लोक की संपदा, रही सील में आन॥

सत्य, अहिंसा, सेवा, परोपकार, ये शीलवान व्यक्ति के स्वाभाविक सद्गुण बताए गए हैं। कहा गया है कि ‘ईश्वर अंश जीव अविनाशी’ यानी, मानव भगवान का अंशावतार है। अतः उसे नर में नारायण के दर्शन करने चाहिए। दीन-दुखियों की सेवा करने वाला, अभावग्रस्तों व बीमारों की सहायता करने वाला मानो साक्षात भगवान की ही सेवा कर रहा है। निष्काम सेवा को धर्मशास्त्रों में निष्काम भक्ति का ही रूप बताया गया है।

स्वामी विवेकानंद तो सत्संग के लिए आने वालों से समय-समय पर कहा करते थे, ‘आचरण पवित्र रखो और दरिद्रनारायण को साक्षात भगवान मानकर उसकी सेवा-सहायता के लिए तत्पर रहो। लोक-परलोक, दोनों का सहज ही में कल्याण हो जाएगा।’ हम अपनी शुद्ध और बुद्ध आत्मा से अनाथों, निर्बलों, बेसहारा लोगों की सेवा करके पितृऋण, देवऋण और आचार्य ऋण से मुक्त हो सकते हैं।

मदद

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गीतोपदेश' विहंगम दृश्य और झिंझोड़ता सबक....     दोनों तरफ लाखों-करोड़ों की सेना। दोनों ही पक्षों में ऐसे सेकड़ों योद्धा जो अकेले ही युद्ध का परिणाम बदल दें। युद्ध के अंतिम निर्णायक तो श्री कृष्ण ही थे। किन्तु कृष्ण के अतिरिक्त पांडव पक्ष का सारा का सारा दारोमदार अर्जुन पर ही था। वही अर्जुन अचानक मोह और कायरता से ग्रसित यानि कि संक्रमित हो गया। ऐसे में श्री कृष्ण, जो कि अधर्म का विनाश करने ही अवतरित हुए थे को सक्रीय होना पड़ा। लगभग पूरी तरह हताश हो चुके अर्जुन को विष्णु अवतार गोविंद ने इंसानी जिंदगी के जो सूत्र दिये वे आज भी कालजई हैं। महाभारत के उस अद्भुत और अद्वितीय दृश्य से जो अनमोल सबक मिलते हैं, वो इंसान को जिंदगी का महाभारत जीतने का रहस्य दे जाते है:-- स्वयं श्री कृष्ण इंसान को विश्वास दिलाते हैं कि यदि हम न्याय और कर्तव्य के रास्ते पर हैं, तो वो खुद हमारे जीवन रथ की लगाम अपने हाथ मे ले लेंगे।- जीवन है तो संघर्ष भी है। धर्म, न्याय और कर्तव्य की रक्षा के लिये यदि युद्ध भी करना पड़े तो जरूर करना चाहिये।- इंसान को ईश्वर ने संघर्ष करने और शक्तिवान बनने ही भेजा है। संघर्षों से मुक्त सीधी सरल और आसान जिंदगी कोरी कल्पना के सिवाय कुछ भी नहीं।- मोह इंसान को कायर और कमजोर बनाता है अत: इस पर सदैव नियंत्रण रखें।- धर्म, न्याय और कर्तव्यों के लिये जो इंसान, अपनी जान हथेली पर रख कर लडऩे को तैयार हो जाता है उसे धन, मान-सम्मान और प्रसिद्धि अपने आप ही मिल जाती है।- किस्मत हमेशा संघर्ष करने वालों का ही साथ देती हैं। यह सौ फीसदी सत्य है कि भगवान भी उसी की सहायता करता हैं जो स्वयं अपनी मदद करता है

वाणी

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धर्मशास्त्रों में वाणी संयम पर बहुत बल दिया गया है। मनुस्मृति में कहा गया है
पारुष्यमनृतं चैवं पैशुन्यं चापि सर्वशः। असंबद्ध प्रलापश्च वांगमयं स्याच्चतुर्विधम्।
अर्थात् वाणी में कठोरपन लाना, झूठ बोलना, दूसरे के दोषों का वर्णन करना और व्यर्थ बातें बनाना, ये वाणी के चार दोष हैं। इन दोषों से बचने वाला व्यक्ति हमेशा सुखी और संतुष्ट रहता है।
किसी कवि ने कहा था, ‘रसों में रस निंदा रस है।अनेक श्रद्धालु भगवद्कथा सुनने जाते हैं, तीर्थों सत्संगों में जाते हैं, किंतु वहां भी भगवल्लीला के अनूठे प्रेम रस भक्ति रस से तृप्त होने की जगह निंदा रस का रसास्वादन करने में नहीं हिचकिचाते। मौका मिलते ही दूसरों की निंदा और दोष वर्णन करने में लग जाते हैं। संस्कृत में दूसरे के दोष देखने कोपैशुन दोषकहा गया है। 

धर्मशास्त्रों में पंचविध चांडालों में पैशुनयुक्त पुरुष को भी एक प्रकार का चांडाल माना गया है। एक संस्कृत श्लोक में बताया गया है कि दूसरे व्यक्ति में दोष देखने वाला, दूसरों के अवगुणों का वर्णन करने वाला, किए गए उपकार को याद रखने वाला तथा बहुत देर तक क्रोध को मन में रखने वाला व्यक्ति चांडाल श्रेणी में ही आता है। पैशुन दोष को वाणी के तप द्वारा जीतने की प्रेरणा देते हुए महर्षि कहते हैं, ‘उद्वेग से रहित वाणी का उच्चारण, सत्य, प्रिय और हितकर वचन बोलना, अनर्गल बातचीत में समय व्यर्थ करके सत्साहित्य का अध्ययन करना एवं भगवन्नाम का कीर्तन करना वाणी का तप कहलाता है। अतः वाणी से प्रत्येक शब्द सोच-समझकर निकालने में ही लाभ होता है।

मोक्ष

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प्रवचन की समाप्ति के बाद भगवान गौतम बुद्ध के पास कई लोग आते थे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त करते थे। एक दिन एक ग्रामीण गौतम बुद्ध के पास आया और बोला- भगवन, आप कई वर्षो से शांति, सत्य और मोक्ष की बात लोगों को समझा रहे हैं किंतु अब तक कितने लोगों को मोक्ष मिला है? बुद्ध ने कहा- तुम कल आना, तब मैं तुम्हारी बात का उत्तर दूंगा, किंतु आने से पहले एक काम करना- पूरे गांव का चक्कर लगाते हुए सभी लोगों से पूछकर आना कि कौन-कौन शांति चाहते हैं और कौन-कौन सत्य एवं मोक्ष। अगले दिन उस ग्रामीण ने घंटों गांव का चक्कर लगाया, किंतु उसे एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिला, जो शांति, सत्य और मोक्ष चाहता हो। कोई धन चाहता था तो कोई यश। किसी को संतान चाहिए थी तो किसी को दीर्घायु। ग्रामीण बुद्ध के पास आकर बोला- यह विचित्र गांव है भगवन। कोई कुछ चाहता है तो कोई कुछ, लेकिन शांति, सत्य और मोक्ष चाहने वाला कोई नहीं है। तब बुद्ध ने उत्तर दिया- इसमें विचित्र कुछ नहीं है। हममें से प्राय: सभी सुख चाहते हैं, शांति नहीं। सुख प्राप्ति के लिए वे शांति के विपरीत मार्ग पर चलते हैं, लेकिन सुख का मार्ग शांति का मार्ग नहीं है। सार यह है कि व्यक्ति सुख की खोज भौतिकता में करता है जो निरंतर लिप्सा को बढ़ाती है और लिप्सा कभी शांति नहीं आने देती। शांति का मार्ग संतोष और सीमित चाह में निहित होता है और शांति ही सही मायनों में सुख की वाहक है क्योंकि सुख शरीर से बढ़कर आत्मा का विषय है

बुधवार, मई 05, 2010

आदरणीय पाबला जी मार्गदर्शन करे

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आज कल मेल खोलते ही मुझे ईनाम जीतने की अनेक मेल पढ़ने को मिल रही! अनेक बार मन खीज उठता है की इन से छुटकारा केसे पाउ! आज एक ईमेल मिली! अजीबो गरीब मेल! आदरणीय पाबला जी की तरफ़ यह मेल भेज रह हूं कि इस मेल पर उनके सैनिक क्या कहते हैं! मार्गदर्शन करे कि ऐसी मेलों से कैसे छुटकारा पाउ?
प्राप्त मेल यह है-


Counter-terrorism and Cyber Crime Division
FBI Headquarters in Washington, D.C.
Federal Bureau of Investigation
J. Edgar Hoover Building
NW Washington, D.C. 20535-0001
TELEPHONE: (206)984-0609
FAX: (206)984-0609
Attention Beneficiary,
I once again try to notify you as our email to you was returned as a failure delivery (undelivered), hence I hereby attempt to reach you via your e-mail address. Records show that you are among one of the individuals and organizations who are yet to receive their overdue payment from overseas which includes those of Lottery/Gambling, Contract and Inheritance. Through our Fraud Monitory Unit we have also noticed that over the past you have been transacting with some imposters and fraudsters who have been impersonating the likes of Prof. Soludo of the Central Bank Of Nigeria, Mr. Patrick Aziza, Frank, Anderson, none officials of Oceanic Bank, Zenith Banks, Kelvin Young of HSBC, Ben of FedEx, Ibrahim Sule, Dr. Usman Shamsuddeen and some imposters claiming to be The Federal Bureau of Investigation.
The Cyber Crime Division of the FBI gathered information from the Internet Crime Complaint Center (ICCC) formerly known as the Internet Fraud Complaint Center (IFCC) of how some people have lost outrageous sums of money to these imposters. As a result of this we hereby advise you to stop communication with any one not referred to you by us.
We have negotiated with the Federal Ministry of Finance that your payment totaling $6,100,000.00 will be released to you via a custom pin based ATM card with a maximum withdrawal limit of $5,000 a day which is powered by Visa Card and can be used anywhere in the world were you see a Visa Card Logo on the Automatic Teller Machine (ATM). We have advised that this should be the only way at which you are to receive your payment because it’s more guaranteed, since over $5 billion was lost on fake cheque last year 2008.
We guarantee 100% receipt of your payment, because we have perfected everything in regards to the release of your $6.1 million United States Dollars to be 100% risk free and free from any hitches as it’s our duty to protect citizens of the United States of America. (This is as a result of the mandate from US Government to make sure all debts owed to citizens of American which includes Inheritance, Contract, Gambling/Lottery etc are been cleared for the betterment of the current economic status of the nation and its citizens as he has always believed “Our Time for Change has come” because “Change can happen.
Below are few list of tracking numbers you can track from FedEx website to confirm people like you who have received their payment successfully.
Name : Donny Peterson:
FedEx Tracking Number: 870456747216
www.fedex.com/Tracking?cntry_code=us
Name : Angela L.Johnson:
FedEx Tracking Number: 870456750392
www.fedex.com/Tracking?cntry_code=us
To redeem your fund you are hereby advised to contact the ATM Card Center via email for their requirement to proceed and procure your Approval of Payment Warrant and Endorsement of your ATM Release Order on your behalf which will cost you $375.00 only nothing more and no hidden fees as everything else has been taken cared of by the Federal Government including taxes, custom paper and clearance duty so all you will ever need to pay is $375.00 only.
Contact Information
Name: Barrister Alex Larry
Email: sir.lexlarry@focusedonreturns.com
Phone: +234-805-716-5514
Your can drop a message on the phone and if your case is important he will call you back but we suggest that you contact him via email.
Do contact Barrister Alex Larry of the ATM Card Center via his contact details above and furnish him with your details as listed below, she is the one to receive the $375 and have your ATM card ship to you:
Your full Name:  DJALOUT
Your Address:    VILLE BOUGUIRAT/ALGERIE
Home/Cell Phone:  2130696763033
On contacting him with your details your files would be updated and he will be sending you the payment information in which you will use in making payment of $375.00 via Western Union Money Transfer for the procurement of your Approval of Payment Warrant and Endorsement of your ATM Release Order.
After which the delivery of your ATM card will be effected to your designated home address without any further delay, no any other extra fee or any authority raising eyebrow.
Upon receipt of payment the delivery officer will ensure that your package is sent within 24 working hours. Because we are so sure of everything we are giving you a 100% money back guarantee if you do not receive your ATM card Shippment Confirmation within the next 24hrs after you have made the payment for shipping.
Once again we are so sure of you receiving your payment at no any other cost as we have taking it upon our duty to monitor everything in other to cub cyber crime that is perpetrated by those impostors.
Thanks and hope to read from you soon.
ROBERT S. MUELLER,
DIRECTOR
FBI Headquarters in Washington, D.C.
Federal Bureau of Investigation
J. Edgar Hoover Building
NW Washington, D.C. 20535-0001








रविवार, मई 02, 2010

हिमाचल निर्माता डा0 यशवंत सिंह परमार

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आज हिमाचल निर्माता डा0 यशवंत सिंह परमार की पुण्य तिथि है! हिमाचल प्रदेश को अस्तित्व लाने और विकास की आधा्रशिला रखने में डा0 यशवंत सिंह परमार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। लगभग 3 दशकों तक कुशल प्रशासक के रुप में जन जन की भावनाओं संवेदनाओं को समझते हुए उन्होने प्रगति पथ पर अग्रसर होते हुए हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए नई दिशाएं प्रस्तुत की। उनका सारा जीवन प्रदेश की जनता के लिए समर्पित रहा वे उम्र भर गरीबों और जरुरतमंदों की सहायता करते रहे। सिरमौर जिला के चनालग गांव में 4 अगस्त 1906 को जन्मे डा0 परमार का जीवन संघर्षशिल व्यक्ति का जीवन रहा । उन्होने 1928 में बी0ए0 आनर्स किया  लखनउ से एम०ए० और एल०एल०बी०  तथा 1944 में समाज शास्त्र में पी एच डी की।  1929-30 में वे थियोसोफिकल सोसायटी के सदस्य रहे । उन्होने  सिरमौर रियासत में 11 वर्षों तक सब जज और मैजिसट्रेट (1930- 37)  के बाद जिला और सत्र न्यायधीश (1937 -41) के रुप में अपनी सेवाए दी।  वे नौकरी की परवाह ना करते हुए सुकेत सत्याग्रह प्रजामण्डल से जुड़े! उनके ही प्रयासों से यह सत्याग्रह सफल हुआ।  1943 से 46 तक वे सिरमौर एसोसियेशन के सचिव, 1946 से 47 तक हिमाचल हिल स्टेट कांउसिल के प्रधान, 1947 से 48 तक सदस्य आल इन्डिया पीपुलस कान्फ्रेस  तथा प्रधान प्रजामण्डल सिरमौर संचालक सुकेत आन्दोलन से जुड़े रहे। डा0 परमार के प्रयासों से ही 15 अप्रेल 1948 को 30 सियासतों के विलय के बाद हिमाचल प्रदेश बन पाया और 25 जनवरी 1971 को इस प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
1948 से 52 सदस्य सचिव हिमाचल प्रदेश चीफ एडवाजरी काउंसिल, 1948 से 64 अध्यक्ष हिमाचल कांग्रेस कमेटी,  1952 से 56 मुख्य मंत्री हिमाचल प्रदेश, 1957 सांसद बने और 1963 से 24 जनवरी 1977 तक हिमाचल के मुख्य मंत्री पद पर कार्य करते रहे किया!डा0 परमार ने पालियेन्डरी इन द हिमालयाज, हिमाचल पालियेन्डरी इटस शेप एण्ड स्टेटस, हिमाचल प्रदेश केस फार स्टेटहुड और हिमाचल प्रदे्श एरिया एण्ड लेगुएजिज नामक शोध आधारित पुस्तके भी लिखी। डा0 परमार  की सादगी और प्रदे्श के प्रति इमानदारी इसी बात से पता चलती है कि 17 वर्षों तक मुख्यमन्त्री पद पर कार्य करने के बावजूद मरणोपरान्त उनके बैंक खाते में मात्र 563 रुपये थे। डा0 परमार 2 मई 1981 को स्वर्ग सिधार गए। आज उनकी पुण्य तिथि पर हम हिमाचल वासी उन्हे उनके योगदान के लिए याद कर रहे है।

शनिवार, अप्रैल 10, 2010

महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन की 107 वीं जयंति

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 हिमाचल साहित्यकार सहकार सभा ने आज 9 अप्रेल को महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन की 107 वीं जयंति पर बिलासपुर में साहित्यक सभा का आयोजन किया! तीन सत्रों मे आयोजित इस सभा में सांस्कृत्यायन के व्यकितत्व और कृतित्व पर विचार विमर्श हुआ तथा लेखक गोष्ठी, पत्र वाचन और कवि पाठ क आयोजन किया गया! आयोजन के मुख्यातिथि थे हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव प्रभात शर्मा और कार्यक्रम की अध्य्क्षता हिमाचल के व्योवृद्ध वरिष्ठ रचनाकार संत राम शर्मा ने की! इस अवसर पर बिलासपुर की ज़िला भाषा अधिकारी डा० अनिता शर्मा भी उपस्तिथ थी!
लेखक गोष्ठी में साहित्य्कात सभा के अध्यक्ष रतन चंद निर्झर ने राहुल सांस्कृत्यायन के हिमाचल पर लेखन पर विवेचना की और मन्डी के जगदीश कपूर ने  विवेचना पर अपने विचार व्यक्त किये!  आयोजन के दूसरे चरण में हिमाचल पत्रकार संघ के अध्यक्ष जय कुमार ने हिमाचल के साहित्य की प्रगति पर अपना पत्र वाचन किया!
तीसरे चरण में काव्य पाठ का आयोजन किया गया! इस सत्र में देहरादून के  तेज पाल नेगी, चण्डीगढ़ के रतन चंद रत्नेश, आलमपुर कांगडा़ के प्रीतम आलमपुरी, चम्बा के अशोक दर्द, हमीरपुए के नरेश राणा, सुंदरनगर के सुरेश सेन निशांत और पवन चॊहान, पद्दर मंडी के कृष्ण चंद महादेविया, मंडी के जगदीश कपूर, सोलन के प्रो० नरेन्द्र अरुण, बल्देव चॊहान ने काव्य पाठ किया जबकि बिलासपुर के  स्थानिय कवियों मेम अनुप मस्ताना, सुशील पुंडेर, रतन चंद निर्झर, प्रदीप गुप्ता, अरुण डोगरा रितु, रवि सांख्यायन, जगदीश जमथली, शक्ति उपाध्याय, राम लाल पुंडीर, कु० सुरभि शर्मा और स्वंत्रता सैनानी के० एल० दबड़ा ने काव्य पाठ किया!
इसी आयोजन में हिमाचल साहित्यकार सहकार सभा ने प्रतिवर्ष 9 अप्रेल को सांस्कृत्यायन जयंति पर साहित्यिक आयोअजन करने, और उनके सम्मान में साहित्यिक पुरस्कार शुरु करने और क्षेत्रिय स्तर पर हिमाचल साहित्यकार सहकार सभा के आयोजन करने  के निर्णय लइये गये ! सभा ने हिमाचल विधान सभा में पहाडी़ बोली के विकास के निर्णय पर खुशी जाहिर करते हुए सरकार का अभार व्यक्त किया गया!
सभा का निकट भविष्य में सहयोगी आधार पर काव्य और लघु कथा संकलन निकालने की योजना है! सभा का पता है
रतन चंद निर्झर, 
अध्यक्ष, हिमाचल साहित्यकार सहकार सभा,
मकान न० 210, रौड़ा सेक्टर 2,
बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश

फोटो साभार : जनोक्ति 

बुधवार, मार्च 31, 2010

बड़ु साहिब

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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर ज़िला में राजगढ़ से 29  किलोमीटर दूर बड़ु साहिब: तपोभूमि, संतो की स्थली और शिक्षा के विस्तार की स्थली बन गई है! यहां जाने का मौका  मुझे 1995 में मिला उस समय किसी काम से राजगढ़ गया तो बड़ु साहिब जाने का अवसर मिला! बड़ु साहिब पर मेरा पहला लेख चण्डीगढ़ से प्रकाशित होने वले अखवार दैनिक ट्रिब्यून हिंदी में 24  जुलाई 1995  को छ्पा था!  तब से लेकर अब तक यहां अभूतपूर्व विकास हुआ है! 
बड़ु साहिब के तपोभूमि बनने की भविष्यवाणी लगभग 90 साल पहले ही हो गई थी ।  इस स्थली में संतो के चमत्कार भी इतिहास में दर्ज है । बडू साहिब का गुरूद्वारा, गुरू की स्तुति के लिए पूर्ण हो चुका है । जिसकी बाहरी सजावट देखते ही बनती है! बड़ु साहिब के प्रमुख कार्यक्रताओं से जानकारी लेते समय जान्कारी मिली की सजावट पर 30 करोड रूप्ये खर्च होने का अनुमान था लेकिन  इस राशि को शिक्षा के विस्तार पर खर्च करने का फैसला किया है ।
 यहाँ  पहले कच्चा गुरूद्वारा  पक्का सिक्ख हुआ करता था । 1986 में कलगीधर ट्रस्ट के अंतगर्त 5 स्कूल थे जिनकी संख्या अब बढकर 70 तक पहुंच गई है । इस ट्रस्ट की उतर भारत में 2012 तक 200 स्कूल खोलने की योजना है जिनकी संख्या 2020 तक 500 तक  बढाई जायेगी! बड़ु सहिब में 1960 से ही लंगर का आयोजन किया गया जा रहा है! 
 मान्यता है की  संत अतर सिंह ने अपने अनुयायियों को 18वीं सदी के अंत में इस स्थली को ढूंढने की बात कही थी । वर्तमान स्थली कभी जोगेन्द्र सिंह की मलकियत होती थी जिसे जोगेन्द्र सिहं ने संतो को सौंप दिया था । 1906 में सन्तो ने इस बात की भविष्यवाणी कर दी थी कि इस स्थली पर शिक्षा का अभूतपूर्व विकास होगा । इस स्थली को गौतम ऋषि, गुरू गोविद सिंह व गुरू नानक देव का आर्शीवाद भी प्राप्त है ।
 बड़ु साहिब में आध्यात्मिक तरीके से इस स्थान पर नशा मुक्ति केन्द्र भी संचालित किया जा रहा है । अढाई सौ बिस्तरों के अस्पताल में मरीजों का उपचार मुफ्त किया जा रहा है । हर साल 4 निःशुल्क कैम्पों के आयोजन के लिए डेढ करोड रूप्ये की राशि खर्च की जाती है ।  बडू साहिब में निर्मित गुरूद्वारें में 10 हजार श्रद्धालुओं के एक साथ बैठने की व्यवस्था है । साथ ही इस स्थान पर  युनिवर्सिटी की स्थापना भी की जा रही है ।
 बड़ु साहिब का वर्तमान स्वरुप हर किसी को आश्चर्य चकित कर देता है कि जंगल के बीच सन्तो के आर्शीवाद से यह धर्मस्थल बन पाया जो आज आस्था का केन्द्र बन गया है! सतनाम वाहेगुरु का पवित्र उदघोष आत्मिक शांति प्रदान करता है! शहरों की भागदोड़ से दूर यह सथल पुनः आने का आमंत्रण स्वतः ही देता है!

सोमवार, मार्च 29, 2010

गल सुणा

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वैसे तो सभी भाषाओं और बोलिओं में ब्लोग लिखे जा रहे है! हिमाचल प्रदेश से भी अनेक लोग हिन्दी और अंग्रेजी में ब्लोगिंग कर रहे है! परंतु पहाड़ी बोली में कोई भी नहीं लिख रहा था! आज मेल खोली तो चिठाजगत की नये चिठों बारे मेल देखी! नये ब्लोगों पर यात्रा करते समय जानकारी मिली की पहाड़ी बोली में भी ब्लोग लेखन शुरु कर दिया गया है! खुशी हुई ! गल सुणा नाम से ब्लोग बना है और उम्मीद की जानी चाहिए कि गल सुणा क्षेत्र विशेष में ना रह कर पूरे हिमाचल की संस्कृति को उभारेगा! जिज्ञासा वश लेखक के परिचय तक पहुंचा तो वह अधुरा मिला ! लेखक को शुभकामनायें !

शुक्रवार, मार्च 19, 2010

मुर्गे के पंख से ईंधन

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अमेरीका में भारतीय मूल के प्रोफ़ेसर मनोरंजन मनो मिश्रा मुर्गे के पंख और कॊफी से ईंधन बना कर सुर्खियों में है! उन्हे इस काम के लिये सम्मानित भी किया गया है! श्री मिश्रा को नेवादा सिस्टम आफ हायर एजुकेशन बोर्ड ने वर्श 2010 की रिजेंट्स रिसर्चर उपाधि से सम्मानित किय है! वे नेवादा विश्वविद्यालय के रेनो रिन्युअल एनर्जी सेंटर के निदेशक है! श्री मिश्रा 1998  से संकाय के सदस्य है! वे अब तक पेटेंट के 10 शोधपत्र प्रकाशित कर चुके है! अभी 12 शोधपत्र प्रकाशित करेगे! श्री मिश्रा सौर हाइड्रोजन हाइड्रोजन भंडारण और सेंसर प्रोद्योगिकी में मह्त्वपूर्ण काम कर चुके है!उन्होने पेयजल से आर्सेनिक अवयव को हटा कर प्रसिद्दी पाई है! श्री मिश्रा शोध क्षेत्र में अनेक महत्व पूर्ण कार्य कर रहें है !

गुरुवार, मार्च 11, 2010

हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट

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राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान हमीरपुर हिमचल प्रदेश के विद्यार्थियों ने हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट तैयार किया है! इससे बिजली उत्पन्न की जा सकेगी! संस्थान के तीसरे वर्ष के विद्यार्थी श्याम कुमार सिंह ने अपने सह्पाठियों हिंमाशु, शिप्रा, नवीन, दीपक और भानु के साथ यह प्रोजेकट बनाया है! इसमें पानी ना होने की स्थिति में हाथ से घुमा कर बिजली बनाई जा सकेगी! यह प्रोटोटाईप प्रोजेक्ट है! इससे एक घर की विद्युत आपुर्ति सक्षम हो सकेगी! 16
 पोल जेनरेटर का प्रयोग करते हुए एकल फेस एसी करंट आसानी से तैयार किया जा सकता है! 64  चुम्बकों क प्रयोग पोल के रुप में किया गया है! क्वायल में 200 फेरे तांबे की तार के लगाये गये है जिससे 5  बल्ब जलाये जा सकते है! इन विद्यर्थियों ने इस प्रोजेक्ट को दो सप्ताह में तैयार किया है! फिलहाल इसे हमीरपुर स्थित राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान के परिसर में प्रदर्शित किया गय है जहां ये बिजली उत्पन्न करके भी दिखा रहे है! संस्थान के इन विद्यार्थियों को बधाई !

रविवार, मार्च 07, 2010

बांस

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अन्य पेड़ों की तुलना में बांस पर्यावरण से 35  प्रतिशत ज्यादा कार्बन डाई आक्साईड गैस सोखने की क्षमता रखता है! अधिक से अधिक बांस के पेड़ न केवल कार्बन डाई आक्साईड कि मात्रा को कम कर सकते है बल्कि ग्लोबल आक्साईड की बढ़ रही मात्रा को भी कम कर सकते है! और ग्लोबल वर्मिंग के खिलाफ लड़ाई में भी बेहद मदगार हो सकते है!

गुरुवार, मार्च 04, 2010

मोहित चौहान को फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार

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मोहित चौहान को मसाकली गाने के लिये (देहली६) फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार दिया गया है! इससे हिमाचल  प्रदेश भी गोरन्वित हुआ है! मोहित गायन में अलग गायन विधि के लिये जाने जाते है! मोहित ने अपना गायन केरियर सिल्क रुट बेन्ड से शुरु किया! २००९ में उनका फ़ितूर एलबम जारी हुआ! मसाकली से पहले वे ए आर रहमान के साथ रंग दे बसंती में भी गायन कर चुके है! मोहित से फ़िल्म जगत और हिमाचल को बेहद आशाये है उनको बधाई औए शुभकामनायें!

मंगलवार, मार्च 02, 2010

अनमोल वचन

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ओशो
दुःख का बोध दुःख से मुक्ति है , क्योंकि दुःख को जान कर कोई दुःख को चाह नहीं सकता और उस क्षण जब कोई चाह नहीं होती और चित वासना से विक्षुब्ध नहीं होता हम कुछ खोज नहीं रहे होते उसी क्षण उस शांत और अकंप क्षण में ही उसका अनुभव होता है जो की हमारा वास्तविक होना है !
कबीर
यदि सदगुरु मिल जाये तो जानो सब मिल गए फिर कुछ मिलना शेष नहीं रहा ! यदि सदगुरु नहीं मिले तो समझों कोई नहीं मिला क्योंकि माता पिता पुत्र और भाई तो घर  घर में होते है ! ये सांसारिक नाते सभी को सुलभ है परन्तु सदगुरु की प्राप्ति दुर्लभ है !
स्वामी रामतीर्थ
त्याग निश्चय ही आपके बल को बढ़ा देता है आपकी शक्तियों को कई गुना कर देता है आपके पराक्रम को दृढ कर देता है वाही आपको ईश्वर बना देता है ! वह आपकी चिंताएं और भय हर लेता है आप निर्भय तथा आनंदमय हो जाते हैं !

शुक्र नीति
समूचे लोक व्यव्हार की स्तिथि बिना नीतिशास्त्र के उसी प्रकार नहीं हो सकती जिस प्रकार भोजन के बिना प्राणियों के शरीर की स्तिथि नहीं रह सकती !

बेंजामिन फ्रेंकलिन
यदि कोई व्यक्ति अपने धन को ज्ञान अर्जित करने में खर्च करता है तो उससे उस ज्ञान को कोई नहीं छीन सकता ! ज्ञान के लिए किये गए निवेश में हमेशा अच्छा प्रतिफल प्राप्त होता है !



भर्तृहरी शतक
जिनके हाथ ही पात्र है भिक्षाटन से प्राप्त अन्न का निस्वादी भोजन करते है विस्तीर्ण चारों दिशाएं ही जिनके वस्त्र है पृथ्वी पर जो शयन करते है अन्तकरण की शुद्धता से जो संतुष्ट हुआ करते है और देने भावों को त्याग  कर  जन्मजात  कर्मों  को नष्ट  करते है ऐसे  ही मनुष्य  धन्य  है !

लेन कर्कलैंड
यह मत मानिये की जीत ही सब कुछ है, अधिक महत्व इस बात का है की आप किसी आदर्श के लिए संघर्षरत  हो ! यदि आप आदर्श पर ही नहीं डट सकते तो जीतोगे क्या ?

शेख सादी
जो नसीहतें नहीं सुनता , उसे लानत मलामत सुनने का सुक होता है !

संतवाणी
दूसरों की ख़ुशी देना सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है !


ईशावास्यमिदं सर्व यत्किज्च जगत्यां जगत
भगवन इस जग के कण कण में विद्यमान है !


चाणक्य
आपदर्थे   धनं  रक्षेद दारान रक्षेद धनैरपि !
आत्मान सतत  रक्षेद  दारैरपि धनैरपि !!
विपति के समय काम आने वाले धन की रक्षा करें !धन से स्त्री की रक्षा करें और अपनी रक्षा धन और स्त्री से सदा करें !

टी एलन आर्मस्ट्रांग
विजेता उस  समय विजेता नहीं बनाते जब वे किसी प्रतियोगिता को जीतते है ! विजेता तो वे उन घंटो सप्ताहों महीनो और वर्षो में बनते  है   जब वे इसकी तयारी कर रहे होते है !

विलियम  ड्रूमंड
जो तर्क को अनसुना कर देते है वह कटर है ! जो तर्क ही नहीं कर सकते वह मुर्ख है और जो तर्क करने का साहस ही नहीं दिखा सके वह गुलाम है !
औटवे
ईमानदार के लिए किसी छदम वेश भूषा या साज श्रृंगार की आवश्यकता नहीं होती ! इसके लिए सादगी ही प्रयाप्त है !


गुरु नानक
शब्दे धरती , शब्द अकास , शब्द शब्द भया परगास !
सगली   शब्द के पाछे , नानक शब्द घटे घाट आछे !!

रविवार, फ़रवरी 28, 2010

होली मुबारक

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बुरा ना मानों होली है ! होली है भाई होली है ! रंग भर दे जीवन में नवीन हो जाये आशा जीवन की पूरी संग मिल बतियाएं अपने दुःख सुख और भुला दे गिले शिकवें भेद भाव ! देस में परदेस में अपनों को मित्रों को समस्त जीवों को होली पर मिले रंग नए नए यही है कामना ! होली हो मुबारक आप सभी को !
orkut scraps

साभार:Orkut scraps

शनिवार, फ़रवरी 27, 2010

तुलसी

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आयुर्वेद में तुलसी को अमृत माना गया है! वैद्यों का मनाना है की अगर प्रतिदिन प्रात:काल बासी मुहं तुलसि का पता चबा कर खाया जाये तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है! तुलसि के रस में संक्रामक रोगो को खत्म करने कि क्षमता हॊती है! काली मिर्च के साथ तुलसी की पत्ती को पीस कर प्रतिदिन सेवन करने से दांतों का दर्द दूर हो जाता है! तुलसी के सेवन कर्णशूल मूत्र संबंधी अनेक बीमारियां दूर होती है!