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शनिवार, अप्रैल 10, 2010

महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन की 107 वीं जयंति

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 हिमाचल साहित्यकार सहकार सभा ने आज 9 अप्रेल को महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन की 107 वीं जयंति पर बिलासपुर में साहित्यक सभा का आयोजन किया! तीन सत्रों मे आयोजित इस सभा में सांस्कृत्यायन के व्यकितत्व और कृतित्व पर विचार विमर्श हुआ तथा लेखक गोष्ठी, पत्र वाचन और कवि पाठ क आयोजन किया गया! आयोजन के मुख्यातिथि थे हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव प्रभात शर्मा और कार्यक्रम की अध्य्क्षता हिमाचल के व्योवृद्ध वरिष्ठ रचनाकार संत राम शर्मा ने की! इस अवसर पर बिलासपुर की ज़िला भाषा अधिकारी डा० अनिता शर्मा भी उपस्तिथ थी!
लेखक गोष्ठी में साहित्य्कात सभा के अध्यक्ष रतन चंद निर्झर ने राहुल सांस्कृत्यायन के हिमाचल पर लेखन पर विवेचना की और मन्डी के जगदीश कपूर ने  विवेचना पर अपने विचार व्यक्त किये!  आयोजन के दूसरे चरण में हिमाचल पत्रकार संघ के अध्यक्ष जय कुमार ने हिमाचल के साहित्य की प्रगति पर अपना पत्र वाचन किया!
तीसरे चरण में काव्य पाठ का आयोजन किया गया! इस सत्र में देहरादून के  तेज पाल नेगी, चण्डीगढ़ के रतन चंद रत्नेश, आलमपुर कांगडा़ के प्रीतम आलमपुरी, चम्बा के अशोक दर्द, हमीरपुए के नरेश राणा, सुंदरनगर के सुरेश सेन निशांत और पवन चॊहान, पद्दर मंडी के कृष्ण चंद महादेविया, मंडी के जगदीश कपूर, सोलन के प्रो० नरेन्द्र अरुण, बल्देव चॊहान ने काव्य पाठ किया जबकि बिलासपुर के  स्थानिय कवियों मेम अनुप मस्ताना, सुशील पुंडेर, रतन चंद निर्झर, प्रदीप गुप्ता, अरुण डोगरा रितु, रवि सांख्यायन, जगदीश जमथली, शक्ति उपाध्याय, राम लाल पुंडीर, कु० सुरभि शर्मा और स्वंत्रता सैनानी के० एल० दबड़ा ने काव्य पाठ किया!
इसी आयोजन में हिमाचल साहित्यकार सहकार सभा ने प्रतिवर्ष 9 अप्रेल को सांस्कृत्यायन जयंति पर साहित्यिक आयोअजन करने, और उनके सम्मान में साहित्यिक पुरस्कार शुरु करने और क्षेत्रिय स्तर पर हिमाचल साहित्यकार सहकार सभा के आयोजन करने  के निर्णय लइये गये ! सभा ने हिमाचल विधान सभा में पहाडी़ बोली के विकास के निर्णय पर खुशी जाहिर करते हुए सरकार का अभार व्यक्त किया गया!
सभा का निकट भविष्य में सहयोगी आधार पर काव्य और लघु कथा संकलन निकालने की योजना है! सभा का पता है
रतन चंद निर्झर, 
अध्यक्ष, हिमाचल साहित्यकार सहकार सभा,
मकान न० 210, रौड़ा सेक्टर 2,
बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश

फोटो साभार : जनोक्ति 

बुधवार, मार्च 31, 2010

बड़ु साहिब

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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर ज़िला में राजगढ़ से 29  किलोमीटर दूर बड़ु साहिब: तपोभूमि, संतो की स्थली और शिक्षा के विस्तार की स्थली बन गई है! यहां जाने का मौका  मुझे 1995 में मिला उस समय किसी काम से राजगढ़ गया तो बड़ु साहिब जाने का अवसर मिला! बड़ु साहिब पर मेरा पहला लेख चण्डीगढ़ से प्रकाशित होने वले अखवार दैनिक ट्रिब्यून हिंदी में 24  जुलाई 1995  को छ्पा था!  तब से लेकर अब तक यहां अभूतपूर्व विकास हुआ है! 
बड़ु साहिब के तपोभूमि बनने की भविष्यवाणी लगभग 90 साल पहले ही हो गई थी ।  इस स्थली में संतो के चमत्कार भी इतिहास में दर्ज है । बडू साहिब का गुरूद्वारा, गुरू की स्तुति के लिए पूर्ण हो चुका है । जिसकी बाहरी सजावट देखते ही बनती है! बड़ु साहिब के प्रमुख कार्यक्रताओं से जानकारी लेते समय जान्कारी मिली की सजावट पर 30 करोड रूप्ये खर्च होने का अनुमान था लेकिन  इस राशि को शिक्षा के विस्तार पर खर्च करने का फैसला किया है ।
 यहाँ  पहले कच्चा गुरूद्वारा  पक्का सिक्ख हुआ करता था । 1986 में कलगीधर ट्रस्ट के अंतगर्त 5 स्कूल थे जिनकी संख्या अब बढकर 70 तक पहुंच गई है । इस ट्रस्ट की उतर भारत में 2012 तक 200 स्कूल खोलने की योजना है जिनकी संख्या 2020 तक 500 तक  बढाई जायेगी! बड़ु सहिब में 1960 से ही लंगर का आयोजन किया गया जा रहा है! 
 मान्यता है की  संत अतर सिंह ने अपने अनुयायियों को 18वीं सदी के अंत में इस स्थली को ढूंढने की बात कही थी । वर्तमान स्थली कभी जोगेन्द्र सिंह की मलकियत होती थी जिसे जोगेन्द्र सिहं ने संतो को सौंप दिया था । 1906 में सन्तो ने इस बात की भविष्यवाणी कर दी थी कि इस स्थली पर शिक्षा का अभूतपूर्व विकास होगा । इस स्थली को गौतम ऋषि, गुरू गोविद सिंह व गुरू नानक देव का आर्शीवाद भी प्राप्त है ।
 बड़ु साहिब में आध्यात्मिक तरीके से इस स्थान पर नशा मुक्ति केन्द्र भी संचालित किया जा रहा है । अढाई सौ बिस्तरों के अस्पताल में मरीजों का उपचार मुफ्त किया जा रहा है । हर साल 4 निःशुल्क कैम्पों के आयोजन के लिए डेढ करोड रूप्ये की राशि खर्च की जाती है ।  बडू साहिब में निर्मित गुरूद्वारें में 10 हजार श्रद्धालुओं के एक साथ बैठने की व्यवस्था है । साथ ही इस स्थान पर  युनिवर्सिटी की स्थापना भी की जा रही है ।
 बड़ु साहिब का वर्तमान स्वरुप हर किसी को आश्चर्य चकित कर देता है कि जंगल के बीच सन्तो के आर्शीवाद से यह धर्मस्थल बन पाया जो आज आस्था का केन्द्र बन गया है! सतनाम वाहेगुरु का पवित्र उदघोष आत्मिक शांति प्रदान करता है! शहरों की भागदोड़ से दूर यह सथल पुनः आने का आमंत्रण स्वतः ही देता है!

सोमवार, मार्च 29, 2010

गल सुणा

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वैसे तो सभी भाषाओं और बोलिओं में ब्लोग लिखे जा रहे है! हिमाचल प्रदेश से भी अनेक लोग हिन्दी और अंग्रेजी में ब्लोगिंग कर रहे है! परंतु पहाड़ी बोली में कोई भी नहीं लिख रहा था! आज मेल खोली तो चिठाजगत की नये चिठों बारे मेल देखी! नये ब्लोगों पर यात्रा करते समय जानकारी मिली की पहाड़ी बोली में भी ब्लोग लेखन शुरु कर दिया गया है! खुशी हुई ! गल सुणा नाम से ब्लोग बना है और उम्मीद की जानी चाहिए कि गल सुणा क्षेत्र विशेष में ना रह कर पूरे हिमाचल की संस्कृति को उभारेगा! जिज्ञासा वश लेखक के परिचय तक पहुंचा तो वह अधुरा मिला ! लेखक को शुभकामनायें !

शुक्रवार, मार्च 19, 2010

मुर्गे के पंख से ईंधन

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अमेरीका में भारतीय मूल के प्रोफ़ेसर मनोरंजन मनो मिश्रा मुर्गे के पंख और कॊफी से ईंधन बना कर सुर्खियों में है! उन्हे इस काम के लिये सम्मानित भी किया गया है! श्री मिश्रा को नेवादा सिस्टम आफ हायर एजुकेशन बोर्ड ने वर्श 2010 की रिजेंट्स रिसर्चर उपाधि से सम्मानित किय है! वे नेवादा विश्वविद्यालय के रेनो रिन्युअल एनर्जी सेंटर के निदेशक है! श्री मिश्रा 1998  से संकाय के सदस्य है! वे अब तक पेटेंट के 10 शोधपत्र प्रकाशित कर चुके है! अभी 12 शोधपत्र प्रकाशित करेगे! श्री मिश्रा सौर हाइड्रोजन हाइड्रोजन भंडारण और सेंसर प्रोद्योगिकी में मह्त्वपूर्ण काम कर चुके है!उन्होने पेयजल से आर्सेनिक अवयव को हटा कर प्रसिद्दी पाई है! श्री मिश्रा शोध क्षेत्र में अनेक महत्व पूर्ण कार्य कर रहें है !

गुरुवार, मार्च 11, 2010

हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट

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राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान हमीरपुर हिमचल प्रदेश के विद्यार्थियों ने हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट तैयार किया है! इससे बिजली उत्पन्न की जा सकेगी! संस्थान के तीसरे वर्ष के विद्यार्थी श्याम कुमार सिंह ने अपने सह्पाठियों हिंमाशु, शिप्रा, नवीन, दीपक और भानु के साथ यह प्रोजेकट बनाया है! इसमें पानी ना होने की स्थिति में हाथ से घुमा कर बिजली बनाई जा सकेगी! यह प्रोटोटाईप प्रोजेक्ट है! इससे एक घर की विद्युत आपुर्ति सक्षम हो सकेगी! 16
 पोल जेनरेटर का प्रयोग करते हुए एकल फेस एसी करंट आसानी से तैयार किया जा सकता है! 64  चुम्बकों क प्रयोग पोल के रुप में किया गया है! क्वायल में 200 फेरे तांबे की तार के लगाये गये है जिससे 5  बल्ब जलाये जा सकते है! इन विद्यर्थियों ने इस प्रोजेक्ट को दो सप्ताह में तैयार किया है! फिलहाल इसे हमीरपुर स्थित राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान के परिसर में प्रदर्शित किया गय है जहां ये बिजली उत्पन्न करके भी दिखा रहे है! संस्थान के इन विद्यार्थियों को बधाई !

रविवार, मार्च 07, 2010

बांस

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अन्य पेड़ों की तुलना में बांस पर्यावरण से 35  प्रतिशत ज्यादा कार्बन डाई आक्साईड गैस सोखने की क्षमता रखता है! अधिक से अधिक बांस के पेड़ न केवल कार्बन डाई आक्साईड कि मात्रा को कम कर सकते है बल्कि ग्लोबल आक्साईड की बढ़ रही मात्रा को भी कम कर सकते है! और ग्लोबल वर्मिंग के खिलाफ लड़ाई में भी बेहद मदगार हो सकते है!

गुरुवार, मार्च 04, 2010

मोहित चौहान को फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार

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मोहित चौहान को मसाकली गाने के लिये (देहली६) फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार दिया गया है! इससे हिमाचल  प्रदेश भी गोरन्वित हुआ है! मोहित गायन में अलग गायन विधि के लिये जाने जाते है! मोहित ने अपना गायन केरियर सिल्क रुट बेन्ड से शुरु किया! २००९ में उनका फ़ितूर एलबम जारी हुआ! मसाकली से पहले वे ए आर रहमान के साथ रंग दे बसंती में भी गायन कर चुके है! मोहित से फ़िल्म जगत और हिमाचल को बेहद आशाये है उनको बधाई औए शुभकामनायें!

मंगलवार, मार्च 02, 2010

अनमोल वचन

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ओशो
दुःख का बोध दुःख से मुक्ति है , क्योंकि दुःख को जान कर कोई दुःख को चाह नहीं सकता और उस क्षण जब कोई चाह नहीं होती और चित वासना से विक्षुब्ध नहीं होता हम कुछ खोज नहीं रहे होते उसी क्षण उस शांत और अकंप क्षण में ही उसका अनुभव होता है जो की हमारा वास्तविक होना है !
कबीर
यदि सदगुरु मिल जाये तो जानो सब मिल गए फिर कुछ मिलना शेष नहीं रहा ! यदि सदगुरु नहीं मिले तो समझों कोई नहीं मिला क्योंकि माता पिता पुत्र और भाई तो घर  घर में होते है ! ये सांसारिक नाते सभी को सुलभ है परन्तु सदगुरु की प्राप्ति दुर्लभ है !
स्वामी रामतीर्थ
त्याग निश्चय ही आपके बल को बढ़ा देता है आपकी शक्तियों को कई गुना कर देता है आपके पराक्रम को दृढ कर देता है वाही आपको ईश्वर बना देता है ! वह आपकी चिंताएं और भय हर लेता है आप निर्भय तथा आनंदमय हो जाते हैं !

शुक्र नीति
समूचे लोक व्यव्हार की स्तिथि बिना नीतिशास्त्र के उसी प्रकार नहीं हो सकती जिस प्रकार भोजन के बिना प्राणियों के शरीर की स्तिथि नहीं रह सकती !

बेंजामिन फ्रेंकलिन
यदि कोई व्यक्ति अपने धन को ज्ञान अर्जित करने में खर्च करता है तो उससे उस ज्ञान को कोई नहीं छीन सकता ! ज्ञान के लिए किये गए निवेश में हमेशा अच्छा प्रतिफल प्राप्त होता है !



भर्तृहरी शतक
जिनके हाथ ही पात्र है भिक्षाटन से प्राप्त अन्न का निस्वादी भोजन करते है विस्तीर्ण चारों दिशाएं ही जिनके वस्त्र है पृथ्वी पर जो शयन करते है अन्तकरण की शुद्धता से जो संतुष्ट हुआ करते है और देने भावों को त्याग  कर  जन्मजात  कर्मों  को नष्ट  करते है ऐसे  ही मनुष्य  धन्य  है !

लेन कर्कलैंड
यह मत मानिये की जीत ही सब कुछ है, अधिक महत्व इस बात का है की आप किसी आदर्श के लिए संघर्षरत  हो ! यदि आप आदर्श पर ही नहीं डट सकते तो जीतोगे क्या ?

शेख सादी
जो नसीहतें नहीं सुनता , उसे लानत मलामत सुनने का सुक होता है !

संतवाणी
दूसरों की ख़ुशी देना सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है !


ईशावास्यमिदं सर्व यत्किज्च जगत्यां जगत
भगवन इस जग के कण कण में विद्यमान है !


चाणक्य
आपदर्थे   धनं  रक्षेद दारान रक्षेद धनैरपि !
आत्मान सतत  रक्षेद  दारैरपि धनैरपि !!
विपति के समय काम आने वाले धन की रक्षा करें !धन से स्त्री की रक्षा करें और अपनी रक्षा धन और स्त्री से सदा करें !

टी एलन आर्मस्ट्रांग
विजेता उस  समय विजेता नहीं बनाते जब वे किसी प्रतियोगिता को जीतते है ! विजेता तो वे उन घंटो सप्ताहों महीनो और वर्षो में बनते  है   जब वे इसकी तयारी कर रहे होते है !

विलियम  ड्रूमंड
जो तर्क को अनसुना कर देते है वह कटर है ! जो तर्क ही नहीं कर सकते वह मुर्ख है और जो तर्क करने का साहस ही नहीं दिखा सके वह गुलाम है !
औटवे
ईमानदार के लिए किसी छदम वेश भूषा या साज श्रृंगार की आवश्यकता नहीं होती ! इसके लिए सादगी ही प्रयाप्त है !


गुरु नानक
शब्दे धरती , शब्द अकास , शब्द शब्द भया परगास !
सगली   शब्द के पाछे , नानक शब्द घटे घाट आछे !!

रविवार, फ़रवरी 28, 2010

होली मुबारक

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बुरा ना मानों होली है ! होली है भाई होली है ! रंग भर दे जीवन में नवीन हो जाये आशा जीवन की पूरी संग मिल बतियाएं अपने दुःख सुख और भुला दे गिले शिकवें भेद भाव ! देस में परदेस में अपनों को मित्रों को समस्त जीवों को होली पर मिले रंग नए नए यही है कामना ! होली हो मुबारक आप सभी को !
orkut scraps

साभार:Orkut scraps

शनिवार, फ़रवरी 27, 2010

तुलसी

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आयुर्वेद में तुलसी को अमृत माना गया है! वैद्यों का मनाना है की अगर प्रतिदिन प्रात:काल बासी मुहं तुलसि का पता चबा कर खाया जाये तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है! तुलसि के रस में संक्रामक रोगो को खत्म करने कि क्षमता हॊती है! काली मिर्च के साथ तुलसी की पत्ती को पीस कर प्रतिदिन सेवन करने से दांतों का दर्द दूर हो जाता है! तुलसी के सेवन कर्णशूल मूत्र संबंधी अनेक बीमारियां दूर होती है!

शुक्रवार, फ़रवरी 26, 2010

प्राकृतिक रोशनी

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एक शोध के अनुसार धूप की पूरी मात्र ना मिलने के कारण  युवा देर तक सोने के आदी बन रहे है ! वास्तव में नीद की समस्या मेलाटोनिन  हारमोनों की कमी के  कारण होती है जो हमें प्राकृतिक रोशनी से प्राप्त होती है ! आलस बने रहने से युवाओं की क्षमता भी प्रभावित होती है !


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Testing

हींग तेरे क्या क्या रंग!

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हींग गर्म तीक्ष्ण वात कफ़ और शूल को नष्ट करती  है और पित प्रकोपक होती है! यह रस मे कटु और उष्ण वीर्य होती है ! भोजन में रुचि उत्पन्न करती है! हींग को सौंफ़ के अर्क में देने से मूत्रावरोध में लभ होता है! हींग को पानी घोल कर नाक में उसकी बूंदे ढालने से आधा सीसी रोग में आराम मिलता है! हींग को पानी में उबाल कर इस पानी से कुल्ले करने से दांत का दर्द दूर होता है! अथवा दांत के पीले भाग मेम हींग भरने से दन्तकृमि नष्ट हो जाते है और दांत की पीड़ा मिट जाती है! हींग के सेवन से गर्भाशय की शुद्धि होती है मासिक धर्म साफ और समय से होने लगता है ! उदर वेदना को मिटाता है! निम्न चूर्ण को बना कर सेवन करने से अनेक रोगों में लाभ देने वाल होता है ! घी में सेंकी हुई हींग और काली मिर्च सेंधा नमक अजवाईन ज़ीरा सफेद और शाह ज़ीरा को समभाग में मिला कर चूर्ण बनाये ! थोड़ा चुर्ण भोजन से पूर्व खाने से अजीर्ण वायु हैजा आदि रोगों में आराम मिलत है! गर्म पानी के साथ मटर के बराबर हींग निगल जाने से उदरशूल अतिसार हिचकी और उल्टी में शीघ्र आराम मिलता है! कब्जियत के पुराने रोगियों के लिये हींग लाभदायक होत है! पेट दर्द होता हो तो हींग को थोड़े से पानी में मिला कर नाभि के आसपास और पेट पर इसका लेप लगाने से आराम मिलता है! बच्चों के पेत मरोड़ हो रहा हो तो नाभि के ऊपर लेप लगाने से बच्चे को आराम मिल जाता है ! हींग तो हींग है इसके क्या कहने.......
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शुक्रवार, फ़रवरी 19, 2010

ठोडा

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ठोडा हिमाचल  प्रदेश के कुछ जिलों में विशेष अवसरों पर खेला जाने वाला संगीतमय खेल है ! तीर कमान के प्रदर्शन के  इस खेल को महाभारत काल से जोड़ कर भी देखा जाता है ! माना जाता है की ठौड़ा की उत्पति महाभारत काल में हुई थी! इसे पांडवों और कोरवों के मध्य हुए युद्ध के रूप में देखा जाता है ! ठौड़ा दल में दो दल होते है जिन्हें पाषंड   और शाठंड  कहा जाता है ! पाषंड को पांडव और शाठंड को कोंरव का रूप माना जाता है! प्रदेश के गाँव में होने वाले मेलों में ठौड़ा दलों को प्रदर्शन के लिए बुलाया जाता है ! दल एक विशेष प्रकार की सफ़ेद पोशाक पहनता है ! हिमाचल प्रदेश के उपरी इलाको ठियोग और चोपाल क्षेत्रो तथा सिरमौर के राजगड क्षेत्र में मेलों के अवसर पर ठौड़ा खेल का आयोजन किया जाता है ! ठौड़ा को ये दल अपने स्तर पर ही जिन्दा रखे हुए है जो सराहनीय है !
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गुरुवार, फ़रवरी 18, 2010

एक वर्ष की यात्रा

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लगभग एक वर्ष पूर्व आज ही के दिन प्रयोग के तोर पर ब्लोगिंग शुरू की ! एक वर्ष की यात्रा में बहुत कुछ सीखने  को मिला ! ब्लोगिंग को किस तरह सवारा जाये हिंदी टिप्स से  जाना  ! साज सझा के लिए ब्लोगर ट्रिक्स   ने बहुत कुछ दिया ! ब्लोग्वानी चिट्ठाजगत हिंदी लोक पर अनेक रचनाये पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ जो मेरे लिए प्रेरणा दायक रहा !  साहित्यिक  और समाचार आधारित ब्लोग्स पर अच्छी रचनाये और समाचार पढ़ने को मिले !  इस एक वर्ष में अनेक मित्रों की सुभकामनाये और सुझाव प्राप्त हुए जो मुझे प्रोत्साहित करते रहे ! इंटरनेट के माध्यम से बहुत यात्रा की जो मुझे बेहद लाभदायक  रही ! अच्छी और बुरी सभी तरह की साइटों  का अवलोकन किया ! इस यात्रा में मेरे सहयात्री रहे मित्रों का धन्यवाद कारण चाहुगा जिन्होंने सुझाव दे कर मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया !
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मंगलवार, फ़रवरी 02, 2010

आश्चर्य किन्तु सत्य

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आज विश्व में जावन प्रजाति के गैंडों की संख्या मात्र 100 रह गई है !

न्यू गिनी द्वीप पर पक्षियों की कई ऐसी प्रजातियाँ पाई जाती है जिनके पंखों में ज़हर होता है !

कई बार व्यक्ति कलाकार न होते हुए भी कई महत्त्व पूर्ण कम कर जाता है जिससे वह इतिहास में जगह बना लेते है ! चीन के शैनड़ोंग आर्ट्स महाविधालय के एक अध्यापक ने 2007 में शैनड़ोंग म्यूजियम में फ़ॉसिल नामक अपनी कलाकृति का प्रदर्शन किया था जो पुराने कम्पूटर के पुर्जों की मदद से बनाई गई थी ! इसे अब aap क्या कहेगे !




रविवार, जनवरी 24, 2010

प्रेम करो

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जेन  संत बेन्जोई ने अपना जीवन बच्चों को शिक्षा देने और उन्हें संस्कारित करने को समर्पित किया हुआ था वे अपने आश्रम में शिक्षा देते की सभी से प्रेम करों ! असह्यों की सेवा  और मदद करों ! एक बार उनके यहाँ एक लड़का चोरी करते हुए पकड़ा गया ! संत ने उसे चोरी न करने की सलाह दी ! परन्तु उस लडके ने फिर चोरी की ! संत ने एक बार फिर उसे क्षमा  कर दिया  ! अन्य   शिष्य  इस बात से दुखी हुए की यह बार बार चोरी करता है और गुरुदेव इसे माफ़ कर देते है ! यह  बात उन्होंने सैट को बताई और कहा की  एसा चलेगा तो हम आश्रम छोड़ कर चले जायेगे ! संत  ने उन सभी को  समझाया की यह लड़का अपने पिता और भाइयों  द्वारा ठुकराया  गया और इसका पिता व्यसनी था ! इसे सुधरने का जिमा हमारा है ! सत ने उन्हें आगे समझाया की तुम अगर आश्रम से चले जाओगे तो अन्य कोई अध्यापक  तुम्हे शिक्षा दे सकता है परन्तु  इस लडके को कोई भी अपने पास नहीं रखना  चाहेगा ! इसे सुधरने का मोका नहीं मिलेगा ! अन्य शिष्यों के साथ उस बालक ने भी  संत की यह बात सुनी ! उसने सभी के सामने कसम खाई की वह भविष्य में कभी भी चोरी नहीं करेगा !आगे चल कर वह बालक सद्कार्यों में ही लगा रहा ! संत का प्रेम का पाठ  सभी शिष्यों ने आत्मसात किया !
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बुधवार, जनवरी 20, 2010

अजब गजब

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कई बार मनुष्य अपने शरीर की किसी विकृति या विशेषता का प्रयोग कुछ अद्भुत कर दिखाने के लिए कर लेता है १ इस प्रकार के प्रयोगों से लोगों कुछ ऐसा देखने को मिलाता हा जो उन्होंने पहले कभियो नहीं देखा होता ! चीन के जियान शहर के झांग योंग्यंग को जब पता चला की वह अपनी झीभ से अपनी नाक को छू सकते है तो वह अपनी इस विशिष्ठ शारीरिक योगता का प्रयोग अपनी झीभ से सुन्दर लेखन ( केलिग्राफी ) करने के लिए करने लगा !  अब वह झीभ को स्याही में डुबो कर सुन्दर सुन्दर चीनी शब्द लिखते है ! भारत में भी ऐसे लोगो की कमी नहीं है जो इससे भ बाद कर करतब दिखाते है ! पिछले  दिनों  एक टी वी चेनल पर भी अजब गजब करतबों पर आधारित एक कार्यक्रम चला था जिसमें भारतीय करतब बाजों ने लोगो को उनकी तारीफ करने पर मजबूर किया ! अजब गजब कारनामों से संसार से नाम कमाने वालों की कमीं नहीं है !

रविवार, जनवरी 10, 2010

आओ ऐसे झूला झूले

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झूला झूलने का अपना एक रोमांच होता है ! हर कोई इसे अनुभव करना चाहता है! लेकिन 2007 में न्यूयार्क अमेरिका के रिचर्ड रोद्रिगुएज ने जिस तरह इस रोमांच को अनुभव किया उसे कोई और अनुभव नहीं करना चाहेगा ! इस 48 वर्षीय रोलर कोस्टर ने 17 दिनों तक एक बड़े झूले पर बिताएं ! उन्होंने यह कारनामा उत्तरी इंग्लेंड के ब्लेकपुल पलैजर बीच पर कर दिखाया था ! वह प्रत्येक एक घंट बाद 5 मिनट का विराम लेता था ! रोलर कोस्टर पर ही खाते पिटे और सोते थे ! इस तरह रिचर्ड ने 8 हज़ार चकर पुरे किये जो 10 हज़ार 1 सौ 40 किलोमीटर बनता था ! ये दुरी ब्लेकपुल से उसके गृह नगर की दुरी के बराबर थी !

शनिवार, जनवरी 09, 2010

नृत्य शेलियाँ

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नृत्य के क्षेत्र में विभिन्न देशों में अलग अलग नृत्य शेलियाँ और नृत्य रूपक प्रसिद्ध है ! इनमें से कुछ तो बहुत ही अद्भुत है जिनमें चीन और जापान के ड्रेगन नृत्य है १ इसी प्रकार की एक अद्भुत शेली का नृत्य रोमानिया के सर्कस में शारीरिक कलाबाजियां दिखाने वाले लोआन बेनिआमिन ओप्रिया भी करते है ! वे एक प्लास्टिक की ट्यूब  में छुप कर विभिन्न  तरह की आकृतियों आयर नृत्य   का प्रदर्शन करते है ! अपनी एक सहयिका की मदद से वे ओक्तोपस नृत्य भी दिखाते है इन्हें अपनी इस विशेष प्रकार की कलाबाज़ी में निपुणता हासिल है !
 
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