google.com, pub-7517185034865267, DIRECT, f08c47fec0942fa0 आधारशिला : कुछ हुआ होगा

Friday, April 04, 2025

बुधवार, सितंबर 14, 2022

कुछ हुआ होगा

कुछ ना कुछ तो हुआ होगा कुछ  जो  छुपा रहे हो

जानता समझता हूँ सच झठ, तुम क्या बता रहे हो।

 

आसां नहीं होता खुद को यूं ग़म में डुबो देना,

आज तुम रिश्ते नातों अपनों को गंवा रहे हो।

 या ख़ुदा कभी तो मिलोगेढूंढ ही लूंगा तुम्हे,

मत बताना मत कहना, रास्ता लम्बा बता रहे हो।

 

अच्छा है भ्रम है, ये  वफादारी और ये इश्क,

एक तुम क्या हो कि सपनें झूठे दिखा रहे हो।

 

विक्षिप्त है क्या हुआ, क्या यही है इश्क तुम्हारा,

जानता हूँ  झूठ है, दूसरों के  किस्से  सुना रहे हो।


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