google.com, pub-7517185034865267, DIRECT, f08c47fec0942fa0 आधारशिला : बघेरा मर गया

शुक्रवार, जुलाई 25, 2025

बघेरा मर गया

अंतत बघेरा मार गया। उसे मरना ही तो था। कहां से कब आया मालूम नहीं। स्नोई ने चार पीलो को जन्म दिया। उसके लगभग एक माह बाद बघेरा कहां से आया कोई नहीं जानता। स्नोई मुहल्ले की कुतिया थी। वो भी कब कहां से आई मालूम नहीं। मोंटू स्नोई को रोटी डाल दिया करती थी। मुहल्ले में सभी माला सुमित चंदा प्रताप और मैं अक्सर रोटियां डाल दिया करते थे। सभी को जैसे साथी मिल गया हो।  और वाणी और एरिका को तो खिलोना मिल गया था । जब देखो स्नोई से खेलती रहती। 
स्नोई कब शेरू के सम्पर्क में आई कोई नहीं जानता। और कुछ समय बाद  स्नोई ने चार पीलें जने। बाहर खुले में जन्मे तो मोंटू उठा कर ले आई और कैस्पर वाले स्थान में रख दिये। अचरज ये की स्नोई ने मोंटू को कुछ नहीं कहा। दुसरा कोई कुत्ता होता तो बुरी तरह भोंकता। स्नोई भोकीं नहीं देखती रही।
इसी बीच बघेरा भी आ गया।स्नोई ने भी बघेरा को स्वीकार कर लिया था। चारों पिलों के साथ उसकी देखभाल भी करती।  चारों पीलें बघेरा के साथ घुलमिल गए थे । अकसर उनको साथ ही देखता। खेलते सोते खाते पीते। पिले सोते तो बघेरा के ऊपर पसर जाते जैसे उनका बड़ा भाई हो। 
मुहल्ले वाले रोटियां देते वही खा लेता। एरिका और वाणी के लिए पाँचवा खिलोना मिल गया था। सब ठीक ही था।
कल अचानक एक चीख से सुनी जैसे किसी पिले को किसी ने मारा हो जैसे। बाहर देखा तो कुछ नहीं दिखा। 
आज सुबह पता चला कि बघेरा मार गया। मोंटू के आंगन में ही। एरिका वाणी बघेरा को देख रही थी हैरान परेशान। ये क्या हो गया। एरिका ज्यादा परेशान थी।  स्कूल जाने से मना कर रही थी। हम एरिका को नहीं समझ सकते ना ही उसके स्नेह को।  डांट डपट कर एरिका और वाणी को स्कूल भेज दिया। जैसे कुछ हुआ ही नहीं। 
और हां एक बात बताना मैं भूल गया चारों पीलें , बघेरा और स्नोई सभी सुनामी से भी घुलमिल गए थे। सुनामी माला और सुमित की विदेशी नस्ल की कुतिया। बड़ा डर लगता है उससे। स्नोई चारो पीलें और बघेरा सब उससे कब घुलमिल गए मालूम नहीं। अचरज होता था ये देख कर। 
जैन साहब ने प्रेम को बुलाया और बघेरा को दबा दिया।
बघेरा को मरना ही था अपनी शाख से बिछुड़ कर क्या कोई जी सकता है। क्या हुआ जो बघेरा एक कुत्ता था ।  आदमी हो या कुत्ता अपनी शाख से बिछुड़ कर टूट जाता है मर जाता है आखिर। बघेरा को  मरना ही था। और अंततः मर ही गया.....।

#लघुकथा

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