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गुरुवार, जनवरी 12, 2012

मकर संक्रांति

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माघ माह का मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी शनिवार  को मनाया जाएगा। मकर संक्रांति  पर दान का विशेष महत्व है। दान में तिल और गुड़ देना विशेष फल देने वाला माना जाता है। परंपरागत रूप से लोहड़ी पर लोग हवन का आयोजन करते है, जिसमें तिल, घी, मूंगफली की आहुति डाली जाती है।  शिमला के  उपरी क्षेत्रों में संक्रांति पर तिल के लड्डू बनाने की परम्‍परा  है।  लोहड़ी के अगले दिन  मकर संक्रांति पर्व पर दान पुण्य को विशेष महत्‍व  दिया जाता  है। तिल और खिचड़ी के दान को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। घरों में संक्रांति के दिन तिल के व्यंजन और खिचड़ी बनाई जाती है। मकर संक्रांति पर लोग सूर्य पूजन कर पवित्र नदियों में स्नान कर पुण्य प्राप्त करते हैं। कहा जाता है कि माघ माह की पूर्णिमा में जो व्यक्ति ब्राह्मण को दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है।  शिमला के समीप तत्तापानी जो लगभग 51 किलोमीटर है, में भी इस दिन दान पुण्य किया जाता है। यहां तुला दान का विशेष महत्व है। माघ माह के दौरान मनुष्य को कम से कम एक बार पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। माघ माह में सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर अवश्य तीर्थ स्नान करना चाहिए। माघ माह में पवित्र नदियों में स्नान करने से विशेष ऊर्जा प्राप्त होती है। वहीं शास्त्रों और पुराणों में वर्णित है कि इस माह में पूजन तथा  स्नान करने से भगवान नारायण को प्राप्त किया जा सकता है। शिमला से तत्तापानी  धामी, बसंतपुर मार्ग से पंहुचा जा सकता है । बर्फ बारी के चलते मशोबरा सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की स्थिति में इस मार्ग का प्रयोग किया जा सकता है। आम  तौर पर मशोबरा बलदेंया से तत्तापानी पहुंचा जा सकता है। 

सोमवार, जनवरी 09, 2012

'तीसरी आँख' की पुरस्कार/सम्मान-श्रृंखला:

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जितेन्द्र 'जौहर' की त्रैमा. 'अभिनव प्रयास' (अलीगढ़, उप्र) के- बहुचर्चित साहित्यिक स्तम्भ 'तीसरी आँख' की पुरस्कार/सम्मान-श्रृंखला: के बारे में मेल मिली है साहित्यिक मित्रों के लिए विवरण दे रहा हूं 

त्रैमा. 'अभिनव प्रयास' (अलीगढ़, उप्र) के- बहुचर्चित साहित्यिक स्तम्भ 'तीसरी आँख' की पुरस्कार/सम्मान-श्रृंखला:

रविवार, दिसंबर 11, 2011

हिमाचल के लेखकों के लेखन की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

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 ठियोग के डिग्री कॉलेज में साहित्यिक संस्था 'सर्जक की ओर शनिवार को  रखी गई संगोष्ठी में हिमाचल के लेखकों के लेखन की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और उसके सरोकारों को लेकर विचार विमर्श हुआ। इसमें प्रदेश से बाहर से आए वरिष्ठ लेखक और आलोचक सत्यपाल सहगल ने कई टिप्स लेखकों को दिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल में लिखा जा रहा साहित्य किसी तरह भी कमतर नहीं है। उन्होंने कविताओं में अध्यात्म की भी वकालत की। ठियोग में इतने सारे लेखकों के जुटने पर उनका कहना था कि ठियोग प्रदेश की साहित्यिक राजधानी बनता जा रहा है। पहले यह स्थान मंडी को हासिल था। हाल ही में बिहार की 'जनपथ और मध्यप्रदेश की 'आकंठा पत्रिकाओं की और से निकाले गए हिमाचल विशेषांकों के लिए संपादकों अनंत कुमार सिंह और हरिशंकर अग्रवाल का आभार जताया और हिमाचल के वर्तमान लेखन को समग्रता के साथ देश भर के पाठकों के सामने लाने के लिए उन्हें साधुवाद दिया। सर्जक के इस कार्यक्रम का दूसरा सत्र और भी सफल रहा जब हाल में प्रदेश के लगभग सभी वर्तमान हिन्दी कवियों ने अपनी बेहतरीन कविताएं सुनाईं। एक और जहां प्रदेश के स्थापित कवियों अवतार एनगिल, तेजराम शर्मा, रेखा, मधुकर भारती ने अपनी ताजा कविताएं सुनाईं, वहीं आजकल के चर्चित युवा कवियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। ऊना के कुलदीप शर्मा ने अपनी कविता 'सिक्योरिटी गार्ड के जरिए वर्तमान युवा पीढ़ी के असंतोष की ऐसी तस्वीर खींची कि हाल देर तक तालियों से गूंजता रहा। ऊना के ही युवा शायर शाहिद अंजुम ने अपनी गजलों के शेरों में परिवारों के टूटने, रिश्तों के बिखरने और महीन संवेदनाओं की परतें खोलते कई बिंब खींचे। उनकी एक बानगी देखिए-- अब तो मां बाप भी मुल्कों की तरह मिलते हैं-सरहदों की तरह औलाद भी बंट जाती है। केलंग से आए अजेय ने भी अर्थों की गहराई लिए कविता सुनाई। सुरेश सेन निशांत-सुंदरनगर, यादवेंद्र शर्मा, आत्माराम रंजन, ओम भारद्वाज, प्रकाश बादल, सुदर्शन वशिष्ठ, बद्री सिंह भाटिया, सत्यनारायण स्नेही, मोनिका, रत्न चन्द निर्झर, अरुण डोगरा, हरिदत्त वर्मा, देवेन्द्र शर्मा, वेद प्रकाश, सुनील ग्रोवर, मोहन आदि दो दर्जन कवियों ने कविता पाठ किया। पहले सत्र की अध्यक्षता डॉ. सत्यपाल सहगल और दूसरे सत्र की अध्यक्षता अवतार एन. गिल ने की। मंच संचालन सुदर्शन वशिष्ठ और आत्माराम रंजन ने किया।

मंगलवार, दिसंबर 06, 2011

फेसबुक पर शब्‍द चयन

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आज सभी समाचार चैनलों पर फेस बुक पर  की जाने वाली टिप्‍पणियों का समाचार चर्चा होती रही वैसे यह मामला कपिल सिब्‍बल द्वारा उठाया गया। वैसे सिब्‍बल जी ठीक है 1 पिछले दिनों इन्‍ही टिप्‍पणियों के कारण फेसबुक को अलविदा कहने का मन हो रहा था। मित्रों ने फिलहाल इसे टालने का आग्रह किया। फेसबुक पर अधिकतर लोगों में शब्‍द चयन की शालीनता नहीं है। फेसबुक पर अध्‍यापक संघों के पृष्‍ठ बने है । शिक्षा से जुड़ा होने के कारण इन पृष्‍ठों पर जाता रहता हूं परन्‍तु दुख होता है कि शिक्षा से जुड़े लोगो के शब्‍द चयन भी ठीक नहीं है1 एक ने टिप्‍पणी में शुशु और पोटी शब्‍दों का उल्‍लेख करते हुए टिप्‍पणी की तो उस व्‍यक्ति की सोच पर हैरानी होने लगी कि कैसे कैसे लोग है जो सम्‍भवत: शालीनता शब्‍द के महत्‍व को नहीं जानते । वैसे फेसबुक की जाने वाली टिप्‍पणियों पर नज़र रखी जानी चाहिए। फेसबुक सम्‍पर्क और सृजनात्‍मकता  का साधन हो सकता है। वैसे कुछ सन्‍दर्भों को को छोड़ कर मेरा अनुभव अच्‍छा रहा है अच्‍छे और साहित्यिक मित्रों से सम्‍पर्क हो पाया है। खोए हुए मित्रों से पुन: संवाद स्‍थापित हो पाया है। सभी उपयोगिता  को ध्‍यान में रखते हुए टिप्‍पणी करनी चाहिए। ग़लत को ग़लत कहना ही चाहिए समाज में ग़लत मान्‍यताओं का विरोध होना ही चाहिए। लेकिन इस विरोध में शब्‍दों की शालीनता पर भी अवश्‍य ध्‍यान दिया जाना चाहिए । 

रविवार, दिसंबर 04, 2011

देव आनंद नहीं रहे ।

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धर्मदेव आनंद, यानी  देव आनंद नहीं रहे । लंदन में उनका निधन हो गया। देव साहब भारतीय सिनेमा के बहुत ही सफल कलाकार, निर्देशक और फिल्म निर्माता थे । भारत सरकार ने देव आनंद को भारतीय सिनेमा के योगदान के लिए 2001 में पद्मा भूषण और 2002 में दादा साहब फाल्के पुरस्कारों से सम्मानित किया। देव आनन्‍द साहब को सादर नमन 1
 
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