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सोमवार, अक्टूबर 10, 2011

जगजीत सिंह लोकप्रिय गज़ल गायक

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जगजीत सिंह  लोकप्रिय गज़ल गायक । संगीत मधुर और आवाज़ संगीत के साथ खूबसूरती से विलय होती ।  ग़ज़लों को आम आदमी तक पहुंचाने का श्रेय अगर किसी को पहले पहल दिया जाना हो तो जगजीत सिंह का ही नाम ज़ुबां पर आता है। उनकी ग़ज़लों ने न सिर्फ़ उर्दू के कम जानकारों के बीच शेरो-शायरी की समझ में इज़ाफ़ा किया बल्कि ग़ालिब, मीर, मजाज़, जोश और फ़िराक़ जैसे शायरों से भी उनका परिचय कराया।  जगजीत जी का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के गंगानगर में हुआ था। शुरूआती शिक्षा गंगानगर के खालसा स्कूल में हुई और बाद पढ़ने के लिए जालंधर आ गए। डीएवी कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली और इसके बाद कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया. बचपन मे अपने पिता से संगीत विरासत में मिला। गंगानगर मे ही पंडित छगन लाल शर्मा के सानिध्य में दो साल तक शास्त्रीय संगीत सीखने की शुरूआत की। आगे जाकर सैनिया घराने के उस्ताद जमाल ख़ान साहब से ख्याल, ठुमरी और ध्रुपद की बारीकियां सीखीं। गजल के बादशाह जगजीत सिंह का 10 अक्‍तूबर 2011 को मुंबई में देहांत हो गया! जगजीत सिंह को श्रध्दांजली !

गुरुवार, अक्टूबर 06, 2011

दशहरा

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दशहरा सभी स्‍थानों पर परम्‍परागत और हर्षोल्‍लास के साथ मनाया जाता है । स्‍थान छोटा हो या बड़ा आस्‍था के दर्शन सभी जगहों पर होते है । मेरे कस्‍बे में लगभग 15 वर्षों के बाद रामलीला का मंचन किया गया। सभी ने हर्षोल्‍लास के साथ मंचन में साथ दिया। आज दशहरा पर लोगों में हर्ष व्‍याप्‍त था। कुछ तस्‍वीरें दशहरा आयोजन की 


















शुक्रवार, सितंबर 30, 2011

वर्गभेद

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आप जहां रहते है वहां के लोगों से अपनत्‍व होना स्‍वाभाविक है आप चाहे किसी भी क्षेत्र से क्‍यों न हो। इसी अपनत्‍व में लोग आपसे बहुत कुछ चाहने लगते है। यदि आप नहीं दे पाए तो लोगों का मन कितना काला है ये सामने आ ही जाता है। क्‍या कोई ऐसा नहीं है जो ईमानदारी सरलता का सही मूल्‍यांकन कर सके या सभी वर्गभेद में डूबे हुए है । योग्‍यता का कोई सम्‍मान नहीं रहा है शायद। अन्‍तकरण भीतर तक छलनी हो जाता है यह भेद देख कर । क्‍या सभी कसाई है कि मौका मिला तो मुर्गा मरोड़ ही देगे। हम पीछे की ओर चल रहे या अग्रसर है क्‍या मालुम। फूल बोने पर क्‍या कांटे ही मिलते रहेगे। अब तो हद हो गई है यारब ..............


शनिवार, सितंबर 24, 2011

लाटरीयां कैसी कैसी

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अकसर लोग कहा करते है कि अन्‍तरजाल पर आपको अच्‍छी और बुरी हर प्रकार की सामग्री मिल जाती है। यह व्‍यक्ति विशेष पर है कि वह किसका उपयोग कैसे करता है। अन्‍तरजाल पर ठग भी भरे पड़े है । जब भी अपना मेल बाक्‍स खोलता हूं तो विशेष छूट और लाटरी की मेल देखने को मिलती थी । आरम्‍भ में ये सभी मेल पत्र स्‍वरूप में होती थी। लेकिन अब ठगों ने प्रमाण पत्र भेजने शुरू कर दिये है । लेकिन मेल के मसौदे में अन्‍तर कुछ भी नहीं होता। मेल में रूपये भेजने की बात पहले भी होती थी अब भी होती है। फर्क मात्र इतना है कि लाटरी की सूचना प्रमाण पत्रों के साथ सूचित की जाती है साथ ही एक तस्‍वीर लगा राजनायिक परिचय पत्र । अगर आप मेल में बताई गई वेब साईट पर जाते है तो वह होती ही नहीं है। अब इन ठगों ने भारतीय कम्‍पनीयों के नामों का सहारा लेना भी आरम्‍भ कर दिया है। या हो सकता है कि वे भारतीय ठग हो। खैर मेल तो आती रहेगी। भारी भरकम राशि का लालच भी होगा और साथ ही प्रमाण पत्र भी। चलो इस बहाने  इन प्रमाण पत्रों को देख कर खुश हो जाया करेंगे। अपने मित्रों के लिए इन सभी के वेब शाटस दे रहा हूं । रूपया तो मिलने से रहा। आप बधाई तो देगे ही। 

शुक्रवार, जुलाई 22, 2011

श्री खण्‍ड यात्रा की तस्‍वीरें

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मेरे मित्र रमेश चौहान गत दिन श्रीखण्‍ड यात्रा पर गए और लौट कर उन्‍होने तस्‍वीरें दी मित्रों के लिए तस्‍वीरें यहां प्रस्‍तुत है
















 
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